द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
JSSC CGL परीक्षा रद्द किए जाने के मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कई ऐसे न्यायिक फैसलों का हवाला दिया, जिनमें बड़े स्तर पर अनियमितता या नकल सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से परीक्षाओं को रद्द किए जाने की बात कही गई है। सरकार की ओर से दलील दी गई कि यदि किसी परीक्षा में बड़े स्तर पर चीटिंग या अनियमितता होती है, तो पूरी परीक्षा को रद्द किया जा सकता है। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि अभी तक की जांच में यह सामने नहीं आया है कि पेपर लीक हुआ था। कोर्ट ने जांच में पेपर लीक की पुष्टि नहीं होने के पहलू पर भी सवाल उठाए।

व्हाट्सऐप-टेलीग्राम पर पेपर फैलने की दलील
वहीं, हस्तक्षेपकर्ता की ओर से भी कई न्यायिक फैसलों का हवाला दिया गया। हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने दलील दी कि परीक्षा का पेपर व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे माध्यमों के जरिए फैलाया गया था। इस दौरान परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और उसके प्रभाव को लेकर भी पक्ष रखा गया। JSSC CGL परीक्षा रद्द करने के खिलाफ प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता पटवालिया, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन, अमृतांश वत्स समेत अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने दलीलें दीं, जबकि हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने अपना पक्ष रखा। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।