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रूसी तेल पर अमेरिकी ‘30 दिन की छूट’ से सियासत तेज, झामुमो ने भाजपा और बाबूलाल मरांडी को घेरा

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रांची 
रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका के एक फैसले के बाद झारखंड की सियासत में भी बयानबाज़ी तेज हो गई है। अमेरिका के ट्रेज़री सेक्रेटरी Scott Bessent के बयान के बाद झामुमो ने केंद्र सरकार और भाजपा नेताओं पर तीखा हमला बोला है।
दरअसल, अमेरिकी ट्रेज़री सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि डोनाल्ड ट्रंप की ऊर्जा नीति के तहत तेल और गैस उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। इसी बीच अमेरिकी ट्रेज़री विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट देने का फैसला किया है।


अमेरिका का कहना है कि यह सिर्फ अस्थायी व्यवस्था है, ताकि समुद्र में पहले से फंसे रूसी तेल की आपूर्ति वैश्विक बाजार तक पहुंच सके। साथ ही अमेरिकी प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि भारत भविष्य में अमेरिकी तेल की खरीद भी बढ़ाएगा। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार पर ईरान के दबाव को कम करने के लिए बताया गया है। इसी मुद्दे पर झामुमो ने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि भारत की नीतियां अब विदेशी संकेतों के अनुसार तय हो रही हैं। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि इसका मतलब साफ है, “अमेरिका जैसा कहे, वैसा ही हम करते जाएं।”
झामुमो ने भाजपा नेताओं, खासकर झारखंड भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय मुद्दों पर भाजपा नेताओं को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। पार्टी ने सवाल उठाया कि राष्ट्रवाद की बात करने वाले नेता इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं।


पार्टी ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश की संप्रभुता और प्रतिष्ठा से जुड़े मुद्दों पर विदेशी दबाव के सामने झुकना राष्ट्रहित के खिलाफ है। झामुमो ने भाजपा नेताओं से इस विषय पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है कि “देश पहले है या विदेशी स्वीकृति।”
वैश्विक स्तर पर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में रूस से तेल खरीद को लेकर भारत, अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच कूटनीतिक संतुलन का मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।


 

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