पूर्वी सिंहभूम:
सीमित संसाधनों और सख्त दिनचर्या के बीच पढ़ाई का संतुलन बनाते हुए जयपुरा की शिप्रा प्रधान ने मैट्रिक परीक्षा में 97.60 प्रतिशत अंक हासिल कर पूर्वी सिंहभूम जिले में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। उनकी सफलता सिर्फ अंकों की कहानी नहीं, बल्कि एक ग्रामीण परिवार की उस मेहनत और भरोसे का परिणाम है, जिसने हर कठिनाई के बीच शिक्षा को प्राथमिकता दी। लाल बहादुर शास्त्री प्लस टू उच्च विद्यालय, जयपुरा की छात्रा शिप्रा ने बताया कि परीक्षा से दो महीने पहले उन्होंने अपनी दिनचर्या पूरी तरह पढ़ाई के अनुरूप ढाल ली थी।
शिप्रा प्रधान बताती हैं कि रात 1 बजे तक पढ़ाई और सुबह 5 बजे उठकर 6 बजे ट्यूशन के लिए निकल जाना यह क्रम लगातार जारी रहा। “नियमितता ही मेरी सबसे बड़ी ताकत रही,” उन्होंने कहा।

खेती-किसानी करते हैं शिप्रा के पिता
शिप्रा के पिता उत्तम कुमार प्रधान खेती-बाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता मंजू प्रधान गृहिणी हैं। आर्थिक सीमाओं के बावजूद परिवार ने पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी शिप्रा अब आगे विज्ञान संकाय में पढ़ाई करना चाहती हैं, जहां उनकी खास रुचि गणित विषय में है।
प्रधानाध्यापक ने दी शिप्रा को बधाई
विद्यालय के प्रधानाध्यापक आनंद मधुकर ने शिप्रा की उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक बताया और सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष विद्यालय का परिणाम संतोषजनक रहा। कुल 139 परीक्षार्थियों में से 136 सफल हुए, जिनमें 101 प्रथम श्रेणी और 35 द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। केवल एक छात्र असफल रहा। यह उपलब्धि एक बार फिर यह साबित करती है कि अगर संकल्प मजबूत हो, तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक पाती।