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असम में सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा हमला : कहा- चाय बागानों को आदिवासियों ने खून-पसीने से सींचा, लेकिन नहीं मिला हक, अब न्याय की लड़ाई

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द फॉलोअप डेस्क 
असम विधानसभा चुनाव के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनसभाओं में आदिवासी समाज के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि चाय बागानों को आदिवासी समाज ने अपने खून-पसीने से सींचा, लेकिन विडंबना यह है कि वही समाज आज भी हाशिए पर जीने को मजबूर है।
सोरेन ने इसे सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सम्मान, पहचान और ऐतिहासिक न्याय की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने असम की अर्थव्यवस्था को खड़ा किया, उन्हें आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जो लोकतंत्र पर बड़ा सवाल है।


आदिवासी सम्मान और अधिकार का मुद्दा गरमाया
हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज को ‘टी ट्राइब’ जैसे शब्दों में सीमित कर देना और उन्हें बराबरी का अधिकार न देना, सदियों से चली आ रही उपेक्षा और शोषण की मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने अंग्रेजों के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि आदिवासियों को उनके घरों से दूर लाकर बागानों में काम करने के लिए मजबूर किया गया और आजादी के बाद भी उनकी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब समय आ गया है कि आदिवासी समाज को उनकी पहचान, सम्मान और संवैधानिक अधिकार पूरी तरह मिले। “अब चुप्पी नहीं चलेगी, इतिहास के इस अन्याय को मिलकर ठीक करना होगा,” उन्होंने कहा।


चुनावी मैदान में जेएमएम को मिल रहा समर्थन
असम के विश्वनाथ विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करते हुए सोरेन ने कहा कि उन्हें जनता से भरपूर प्यार और आशीर्वाद मिल रहा है, जो उनकी ताकत है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी 9 अप्रैल को मतदाता तीर-धनुष चुनाव चिन्ह पर वोट देकर जेएमएम प्रत्याशी तिहारो गौर को विजयी बनाएंगे और अपने अधिकार हासिल करेंगे।
सोरेन ने अपने भाषण का समापन पारंपरिक अंदाज में “जय जोहार” के साथ किया और स्थानीय भाषा में भी लोगों से समर्थन की अपील की। उनके इस दौरे को असम में जेएमएम के लिए माहौल बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।


 

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