द फॉलोअप डेस्क
झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद महागठबंधन के भीतर बयानबाजी तेज हो गई है। संख्याबल नहीं होने के बावजूद एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी ने जीत दर्ज की, जबकि महागठबंधन समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस की ओर से क्रॉस वोटिंग के आरोप लगाए गए हैं, जिस पर अब राष्ट्रीय जनता दल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। राज्यसभा चुनाव परिणाम के बाद झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि राजद और भाकपा (माले) ने कांग्रेस को धोखा दिया है तथा क्रॉस वोटिंग हुई है। उनके इस बयान के बाद महागठबंधन के सहयोगी दलों में नाराजगी बढ़ गई। राजद नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताते हुए इसे अपनी राजनीतिक विफलता छिपाने का प्रयास करार दिया है।
झारखंड प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में परिणाम से स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस अपने ही सभी विधायकों का समर्थन हासिल करने में नाकाम रही। दूसरे दलों पर बिना सोचे-समझे अनर्गल आरोप लगाने से पूर्व स्वयं में झांककर मंथन और चिंतन करना चाहिए कि विगत मार्च महीने में राज्यसभा के द्विवार्षिक… pic.twitter.com/1plEQOksMz
— Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) June 19, 2026

राजद ने सोशल मीडिया पर जारी किया बयान
राजद ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से जारी बयान में कहा है कि झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजे यह दिखाते हैं कि कांग्रेस अपने ही सभी विधायकों का समर्थन सुनिश्चित करने में असफल रही। पार्टी ने कहा कि दूसरे दलों पर आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए। राजद ने अपने बयान में हरियाणा, ओडिशा और बिहार के राज्यसभा चुनावों का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहां कांग्रेस के कई विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी या मतदान से अनुपस्थित रहे थे, लेकिन उन मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

INDIA गठबंधन की एकजुटता पर भी जताई चिंता
राजद ने अपने बयान में कहा कि झारखंड में कांग्रेस नेताओं की ओर से दिए जा रहे आरोप INDIA गठबंधन की एकजुटता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। पार्टी ने कहा कि हरियाणा, ओडिशा और बिहार में हुई घटनाओं के बावजूद महागठबंधन के अन्य दलों ने कभी कांग्रेस के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की। राजद ने कांग्रेस नेताओं से बचकाने बयानों से बचने और अपने ही दल के भीतर हुई कथित क्रॉस वोटिंग के मामलों पर ध्यान देने की सलाह दी है। राज्यसभा चुनाव के बाद महागठबंधन के भीतर शुरू हुई यह बयानबाजी अब झारखंड की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गई है।