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दावोस सम्मेलन : झारखंड ग्रीन इकोनॉमी की दिशा में दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाने को तैयार

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रांची
दावोस सम्मेलन, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और यूनाइटेड किंगडम की यात्रा के क्रम में झारखंड राज्य ऊर्जा क्षेत्र के वैश्विक अग्रणी निवेशकों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और नीति-निर्माण से जुड़े संस्थानों के साथ व्यापक संवाद स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में राज्य का प्रतिनिधिमंडल प्राकृतिक स्रोतों से उत्पादित ऊर्जा, ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण, स्वच्छ ईंधन और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन से जुड़े निवेश अवसरों को प्रमुखता से सामने रखेगा।
दावोस और यूनाइटेड किंगडम में झारखंड की सहभागिता के ज़रिये राज्य एक ऐसा विकास मॉडल प्रस्तुत कर रहा है जो विश्वसनीय, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक है। यह मॉडल आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ प्रकृति की सीमाओं और आने वाली पीढ़ियों की आकांक्षाओं का सम्मान करता है।


प्राकृतिक संसाधन बनाएंगे झारखंड को एनर्जी ट्रांजिशन में अग्रणी
झारखंड में प्राकृतिक स्रोतों से उत्पादित ऊर्जा की व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं। राज्य के प्रचुर संसाधन उसे एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा में अग्रणी बनाने की क्षमता रखते हैं। प्रतिनिधिमंडल यह स्पष्ट करेगा कि भारत ने नेट-जीरो लक्ष्य और ग्रीन इकोनॉमी की दिशा में दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाने का जो संकल्प लिया है, उसे झारखंड पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाएगा।
“प्रकृति के साथ सामंजस्य में विकास” की अवधारणा को झारखंड अपनी इस पहल के माध्यम से और मजबूती देगा। यह दृष्टिकोण न केवल भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं में झारखंड की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करता है, बल्कि एक टिकाऊ वैश्विक भविष्य के प्रति राज्य की जिम्मेदारी को भी दर्शाता है। यह पहल भारत–यूके के साझा जलवायु लक्ष्यों और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को भी प्रतिबिंबित करती है।
विजन 2050 के अनुरूप आगे बढ़ता झारखंड
युवा झारखंड विजन 2050 के लक्ष्यों को साधने के लिए अपनी समृद्ध विरासत के साथ तेजी से बदलते वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य के अनुरूप खुद को ढाल रहा है। स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों की ओर बढ़ती दुनिया के बीच झारखंड एक संतुलित रास्ता अपना रहा है, जहां ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और रोजगार सृजन के साथ नवीकरणीय और कम-कार्बन ऊर्जा का विस्तार हो।
राज्य सरकार का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों से उत्पादित ऊर्जा न्यायसंगत और समावेशी होनी चाहिए, खासकर उन क्षेत्रों में जहां आजीविका पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर रही है। इसी सोच के तहत झारखंड का मॉडल श्रमिकों के कौशल विकास, सामुदायिक भागीदारी और समान अवसर पर विशेष ज़ोर देता है।


देश की ऊर्जा प्रगति में झारखंड की ऐतिहासिक भूमिका
दशकों से झारखंड भारत के ऊर्जा परिदृश्य का मजबूत स्तंभ रहा है। राज्य के कोयला भंडार, विद्युत संयंत्र, ट्रांसमिशन नेटवर्क और औद्योगिक इकोसिस्टम ने राष्ट्रीय विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूती दी है। बोकारो, पतरातू और चंद्रपुरा जैसे क्षेत्र लंबे समय से भारत की ऊर्जा और इस्पात अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्र रहे हैं।
इसके साथ ही, झारखंड की खनिज संपदा—जो नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, बैटरी निर्माण, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छ विनिर्माण के लिए आवश्यक सामग्रियों से भरपूर है- राज्य को ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन की एक मज़बूत कड़ी के रूप में स्थापित करती है। ऊर्जा नीति को क्रिटिकल मिनरल्स रणनीति से जोड़ते हुए झारखंड ऐसा दृष्टिकोण अपना रहा है, जहां खनन, प्रसंस्करण और ऊर्जा उपयोग पर्यावरणीय सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता के साथ आगे बढ़े। झारखंड भविष्य के ऊर्जा स्रोतों को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।


 

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