रांची
झारखंड सरकार में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के आवास पर जैक बोर्ड (दसवीं) परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के सम्मान में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में रांची जिले के लापुंग, बेड़ो, इटकी, चान्हो एवं मांडर प्रखंड के टॉप-3 छात्र-छात्राओं को आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि “केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान भी जीवन में सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। आप सभी छात्र देश और समाज का भविष्य हैं, और आपकी सफलता पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।”

प्रखंडवार टॉपर्स हुए सम्मानित
लापुंग प्रखंड से प्रथम – राशि गुप्ता (94.60%), द्वितीय – सोहन उरांव (94.20%), तृतीय – रितेश बैठा (92.80%) इटकी प्रखंड से प्रथम – तसमिया परवीन (97.80%), बालिका हाई स्कूल इटकी, द्वितीय – सिदरा फ़ारूक़ी (97.20%), एसडीए मिशन हाई स्कूल, तृतीय – सिदरा तक़दीस (96.60%), फ़ातिमा गर्ल्स एकेडमी इसके साथ ही बेड़ो प्रखंड से प्रथम – कोमल लकड़ा (95.20%), संत अन्ना गर्ल्स हाई स्कूल, द्वितीय – अनामिका कुमारी (93.80%), जनता हाई स्कूल, तृतीय – नमन गुप्ता, मॉडल स्कूल वहीं चान्हो प्रखंड अंतर्गत प्रथम – श्रेया कुमारी (96.20%), सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, द्वितीय – खुशी कुमारी (93.40%), तृतीय – आँचल कुमारी (93.00%), प्रोजेक्ट +2 उच्च विद्यालय और मांडर प्रखंड से प्रथम – महताब अंसारी (98.80%), संत जॉन हाई स्कूल, द्वितीय – आशिया खातून (94.20%), तृतीय – निखिल साहू (94.80%), उत्क्रमित उच्च विद्यालय को सम्मानित किया गया। विशेष रूप से मांडर के छात्र महताब अंसारी ने 98.80% अंक प्राप्त कर राज्य में तीसरा स्थान हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया।
परंपरा के साथ नवाचार
मांडर विधानसभा क्षेत्र में हर वर्ष मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में सफल मेधावी विद्यार्थियों को प्रखंड स्तर पर सम्मानित करने की परंपरा रही है। इस वर्ष इस पहल को नया रूप देते हुए सभी प्रखंडों के टॉप-3 विद्यार्थियों को एक साथ आमंत्रित कर सामूहिक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के साथ एक अनौपचारिक संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें उनके अनुभव, संघर्ष और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई।

संवाद और प्रेरणा का मंच
मंत्री ने कहा कि ये विद्यार्थी आने वाले समय में समाज और राज्य के नेतृत्वकर्ता बनेंगे, इसलिए उनका मनोबल बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। संवाद के दौरान यह बात सामने आई कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों को आर्थिक स्थिति, संसाधनों की कमी और उचित मार्गदर्शन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार पेरेंट्स-टीचर मीटिंग, मोटिवेशनल कार्यक्रमों और मार्गदर्शन सत्रों के माध्यम से लगातार प्रयासरत है। साथ ही, स्कूल मैनेजमेंट कमिटियों (SMC) को सशक्त बनाने, शिक्षा को अधिक व्यवहारिक बनाने और विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर अध्ययन के लिए प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। “सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस” एवं “कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय” जैसी योजनाओं में विद्यार्थियों का बेहतर प्रदर्शन इन प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। अंत में मंत्री ने कहा कि इन विद्यार्थियों की सफलता का सबसे बड़ा श्रेय उनके कठिन परिश्रम, समर्पण और दृढ़ संकल्प को जाता है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनकी यह उपलब्धि न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश भी है।