द फॉलोअप डेस्क
झारखंड के 43 नियोजनालयों में कुल 3,97,960 बेरोजगार युवाओं ने अपना निबंधन कराया है। हालांकि, पिछले दो वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि इनमें से बहुत कम युवाओं को रोजगार मिल सका है। सितंबर 2024 से अगस्त 2026 के बीच नियोजनालयों की ओर से लगाए गए रोजगार मेलों और भर्ती कैंपों के माध्यम से महज 18,990 युवाओं को ही नौकरी मिल पाई। यह संख्या कुल निबंधित बेरोजगारों की सिर्फ 4.55 प्रतिशत है। यानी नियोजनालयों में रजिस्ट्रेशन कराने वाले 95 प्रतिशत से अधिक युवा अभी भी रोजगार की तलाश में हैं। इन निबंधित बेरोजगारों में अकुशल और आठवीं तक पढ़ाई करने वाले युवाओं से लेकर स्नातक, डिप्लोमा और पीएचडी जैसी उच्च डिग्री रखने वाले युवा भी शामिल हैं।

निबंधन के बाद भी लंबा हो रहा इंतजार
नियोजनालय में रजिस्ट्रेशन कराने वाले युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद रहती है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में युवाओं का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। दो वर्षों में 18,990 युवाओं को नौकरी मिलने के बावजूद 3,97,960 निबंधित बेरोजगारों में से अधिकांश अब भी रोजगार की तलाश में हैं। धनबाद की स्थिति भी इसी तस्वीर को सामने रखती है, जहां 35,376 निबंधित बेरोजगार रोजगार मिलने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में केवल नियोजनालय में नाम दर्ज कराना युवाओं के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है। रोजगार के अलावा बेरोजगार युवाओं के बीच बेरोजगारी भत्ता, कौशल प्रशिक्षण और टूल किट उपलब्ध कराने जैसी योजनाओं की मांग भी महत्वपूर्ण हो जाती है। मौजूदा आंकड़ों से साफ है कि नियोजनालयों में पंजीकृत 95 प्रतिशत से ज्यादा युवाओं के लिए फिलहाल रोजगार के बजाय इंतजार ही रह गया है।

बिहार की योजना का भी दिया गया उदाहरण
बिहार में बेरोजगार युवाओं के लिए मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना लागू है। इसके तहत 20 से 25 वर्ष की उम्र के 12वीं पास युवाओं को अधिकतम दो वर्षों तक हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। हालांकि, इस योजना का लाभ उन्हीं युवाओं को मिलता है जो उच्च शिक्षा में नामांकित नहीं हैं। झारखंड में नियोजनालयों में बड़ी संख्या में युवाओं के निबंधन और रोजगार मिलने की कम संख्या के बीच बेरोजगारी भत्ता, कौशल विकास और रोजगार से जुड़ी अन्य सहायता योजनाओं की जरूरत का मुद्दा भी सामने आता है।