रांची
जातीय जनगणना में ओबीसी समाज की वास्तविक संख्या दर्ज करने के लिए अलग ओबीसी कॉलम शामिल करने की मांग को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस ओबीसी विभाग द्वारा कल राजधानी रांची में बापू वाटिका से राजभवन तक विशाल “ओबीसी अधिकार मार्च” का आयोजन किया जा रहा है। मार्च की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राज्य के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में ओबीसी समाज के लोग अपने हक, अधिकार और सम्मान की आवाज बुलंद करने के लिए रांची पहुंचेंगे। झारखंड प्रदेश कांग्रेस ओबीसी विभाग के अध्यक्ष निशांत जसवाल ने कहा कि देश में ओबीसी समाज की आबादी कितनी है, इसका स्पष्ट और प्रमाणिक आंकड़ा सामने आए बिना सामाजिक न्याय और समान अवसर की बात अधूरी है। जातीय जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम नहीं होना करोड़ों लोगों की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति को आंकड़ों से बाहर रखने जैसा है।

वास्तविक आंकड़े बेहद जरूरी
उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज भीख नहीं, अपने हिस्से का अधिकार मांग रहा है। शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सरकारी योजनाओं में भागीदारी के लिए आबादी के वास्तविक आंकड़े बेहद जरूरी हैं। जब जनसंख्या के आंकड़े ही स्पष्ट नहीं होंगे, तब सामाजिक न्याय की नीतियां किस आधार पर बनेंगी? निशांत जसवाल ने कहा कि भाजपा लंबे समय से ओबीसी समाज के नाम पर राजनीति करती रही है, लेकिन जब ओबीसी समाज को उसके अधिकार और वास्तविक प्रतिनिधित्व देने की बात आती है तो वह चुप्पी साध लेती है। अब यह दोहरा चरित्र ओबीसी समाज के सामने पूरी तरह उजागर हो चुका है।
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संवैधानिक अधिकार और सम्मान की लड़ाई का मजबूत संदेश होगा
उन्होंने कहा कि कल का मार्च किसी एक व्यक्ति, दल या संगठन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकार और सम्मान की लड़ाई का मजबूत संदेश होगा। बापू वाटिका से राजभवन तक निकलने वाला यह मार्च केंद्र सरकार से स्पष्ट मांग करेगा कि आगामी जातीय जनगणना में ओबीसी समाज के लिए अलग कॉलम सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने झारखंड के सभी ओबीसी भाइयों-बहनों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में रांची पहुंचकर इस अधिकार मार्च को ऐतिहासिक बनाएं और केंद्र सरकार तक यह संदेश पहुंचाएं कि ओबीसी समाज अब अपने अधिकारों के आंकड़े और अपने हिस्से के न्याय से कोई समझौता नहीं करेगा।

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