द फॉलोअप डेस्क
जामताड़ा सदर अस्पताल एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था और इलाज में कथित लापरवाही को लेकर विवादों में आ गया है। जिले के अलग-अलग प्रखंडों से इलाज के लिए पहुंचे दो मरीजों की अस्पताल में मौत हो गई। मृतकों की पहचान फतेहपुर प्रखंड के चापुड़िया निवासी 25 वर्षीय मुन्ना मोहाली और मिहिजाम के चंद्रदीपा निवासी 45 वर्षीय बाबूराम मरांडी के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि समय पर डॉक्टर नहीं पहुंचे, ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं कराई गई और एम्बुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल सकीं, जिससे दोनों मरीजों की जान चली गई।

डॉक्टर नहीं आने और ऑक्सीजन नहीं मिलने का आरोप
परिजनों के अनुसार, मुन्ना मोहाली को 8 जुलाई की सुबह करीब 8 बजे सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर सदर अस्पताल लाया गया था। उनका आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर मरीज को देखने तक नहीं पहुंचे और पूरा इलाज नर्सों के भरोसे चलता रहा। बिना डॉक्टर की सलाह के इंजेक्शन और सलाइन दी गई, जबकि मरीज को तत्काल ऑक्सीजन की जरूरत थी। परिजनों का दावा है कि समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई। वहीं, दूसरी ओर बाबूराम मरांडी को 8 जुलाई की रात करीब 8 बजे पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि इस मामले में भी डॉक्टर ने समय पर इलाज नहीं किया और रात करीब एक बजे उनकी मौत हो गई।

एम्बुलेंस नहीं मिली, शव वाहन देने से भी किया इनकार
पीड़ित परिवारों ने अस्पताल प्रशासन पर संवेदनहीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आपात स्थिति में 108 एम्बुलेंस सेवा को कई बार फोन किया गया, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। मजबूरी में निजी वाहन से मरीजों को अस्पताल लाना पड़ा। इतना ही नहीं, मुन्ना मोहाली की मौत के बाद शव को घर ले जाने के लिए अस्पताल की ओर से शव वाहन (मोक्ष वाहन) भी उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद परिजनों को निजी एम्बुलेंस का इंतजाम करना पड़ा। मामले की जानकारी मिलने पर भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष बबीता झा अस्पताल पहुंचीं और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि समय पर समुचित इलाज मिलता तो दोनों मरीजों की जान बच सकती थी।

डॉक्टर ने आरोपों से किया इनकार, जांच की उठी मांग
ऑन-ड्यूटी चिकित्सक डॉ. ए.पी.एन. देव ने लापरवाही के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों मरीजों का नियमानुसार इलाज किया गया था। उनके मुताबिक दोनों मरीज पहले से गंभीर और पुरानी बीमारियों से ग्रसित थे, जिसके कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। इधर, मृतकों के परिजनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्रवाई करने और अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन से की है।