द फॉलोअप डेस्क
जामताड़ा जिले के फतेहपुर प्रखंड से विकास के दावों की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है। यहाँ पवनमोड़ से लाकड़टांगा तक जाने वाली करीब 3 किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। विडंबना यह है कि ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन जागा भी और एक साल पहले बड़े तामझाम के साथ सड़क का शिलान्यास भी हुआ, लेकिन आज तक निर्माण की एक ईंट भी नहीं रखी गई। यह आदिवासी बहुल क्षेत्र आज नारकीय स्थिति में जीने को मजबूर है। वर्तमान में सड़क का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है और उसकी जगह बड़े-बड़े गड्ढों और कीचड़ ने ले ली है। स्थिति इतनी विकट है कि सड़क की चौड़ाई कम होने और जर्जर होने के कारण दो लोग एक साथ सड़क पार नहीं कर सकते। राहगीरों को एक-दूसरे के गुजरने का इंतजार करना पड़ता है, जिससे समय की बर्बादी के साथ-साथ दुर्घटनाओं का डर बना रहता है।

चुनवा से पहले हुआ था शिलान्यास
स्थानीय ग्रामीण पूजन, विश्वजीत गोराई, श्रीकांत, मिथुन और सजल ने बताया कि चुनाव से ठीक पहले जनता को लुभाने के लिए आनन-फानन में शिलान्यास तो कर दिया गया, लेकिन उसके बाद विभाग और ठेकेदार इस सड़क को भूल गए। ग्रामीणों का कहना है कि:
बारिश के दिनों में सड़क तालाब का रूप ले लेती है।
पैदल चलना भी जान जोखिम में डालने के बराबर है।
हजारों की आबादी वाले इस क्षेत्र में मरीज को अस्पताल ले जाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

उग्र आंदोलन की चेतावनी
पवनमोड़-लाकड़टांगा मार्ग क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ने वाली मुख्य कड़ी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द ही पक्कीकरण का कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। लोगों का आरोप है कि प्रशासन उनके धैर्य की परीक्षा ले रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।