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जामताड़ा में भ्रष्टाचार की 'लीपापोती'; 1.81 करोड़ का पुल बनने से पहले ही टूटा, सबूत मिटाने में जुटा विभाग!

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​जामताड़ा
जामताड़ा-दक्षिणबहाल मुख्य सड़क पर करीब 1.81 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा डायवर्सन पुल और एप्रोच रोड निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही टूट कर बिखर गया। दक्षिणबहाल जोरिया के पास नवनिर्मित पीसीसी सड़क पर काम खत्म होने से पहले ही गहरी दरारें आ गईं, जिसके बाद ग्रामीणों ने ठेकेदार पर घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल और भ्रष्टाचार का सीधा आरोप लगाया है। मामला मीडिया में आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और अब आनन-फानन में मजदूरों को लगाकर टूटी सड़क को जैसे-तैसे मरम्मत करने और सबूत मिटाने का खेल शुरू कर दिया गया है। 


भ्रष्टाचार और लीपापोती का लाइव प्रमाण
​इस पूरे घटनाक्रम की तीन तस्वीरें विभाग और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा करती हैं। पहली तस्वीर निर्माण कार्य पूरा होने से ठीक पहले की सड़क की है, जहां नवनिर्मित PCC रोड पर गहरी दरारें और टूट-फूट साफ देखी जा सकती है। दूसरी तस्वीर मीडिया और ग्रामीणों के तीखे सवालों के बाद की है, जिसमें विभाग अपनी फजीहत होते देख आनन-फानन में मजदूरों को बुलाकर टूटे हुए हिस्से पर लीपापोती कर उसे फिर से बनाने का प्रयास कर रहा है। वहीं, तीसरी तस्वीर उस कड़वे सच को बयां करती है जहां सबूत मिटाने के उद्देश्य से पूरी तरह से दरार वाली रोड को तोड़कर जैसे-तैसे बराबर कर दिया गया है। 
​क्या है पूरा मामला?
​पथ निर्माण विभाग की देखरेख में करीब 1.81 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 700 मीटर लंबे एप्रोच रोड और डायवर्सन पुल का निर्माण किया जा रहा है। दक्षिणबहाल काली मंदिर से पुलिस लाइन की ओर आने वाली इस एप्रोच रोड पर करीब 50 मीटर लंबी पीसीसी सड़क ढाली गई थी। लेकिन काम खत्म होने से पहले ही इसके लगभग एक मीटर के हिस्से में बड़ी-बड़ी दरारें उभर आईं।ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ठेकेदार द्वारा प्राक्कलन से कम दर (बिलो रेट) पर टेंडर लेने के कारण निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और तकनीकी मानकों को ताक पर रख दिया गया।
विभाग की सफाई और ग्रामीणों का आक्रोश
​सड़क टूटने पर विभागीय अधिकारियों ने अजीबोगरीब तर्क देते हुए दावा किया कि पीसीसी सड़क पर किसी भारी वाहन के गुजरने से यह दरार आई है। हालांकि, ग्रामीण इस दलील से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते विभागीय इंजीनियरों द्वारा प्रभावी निगरानी की जाती, तो जनता के पैसे का इस तरह दुरुपयोग नहीं होता। ग्रामीणों ने अब इस पूरे घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके।दरारों पर पर्दा डालने का कोशिश 
जिस हिस्से में दरार आई है, वहां निर्माण के दौरान पाइप डाला गया था या भारी वाहनों के प्रवेश के कारण नुकसान हुआ है। इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि संवेदक को क्षतिग्रस्त हिस्से को तोड़कर पुनः निर्माण करने का निर्देश दिया गया है तथा गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। बिक्की रवीश मुर्मू, कार्यपालक अभियंता, जामताड़ा
 

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