द फॉलोअप डेस्क
नगर पंचायत जामताड़ा की पहली बोर्ड बैठक सोमवार को भारी गहमागहमी और सियासी ड्रामे के बीच संपन्न हुई। सुबह से शुरू हुआ विवाद शाम तक चला, लेकिन अंततः जनहित से जुड़े 17 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। बैठक का समय सुबह 11:00 बजे निर्धारित था, लेकिन शुरुआत में ही गतिरोध पैदा हो गयी। नव निर्वाचित प्रतिनिधि अपने रिश्तेदारों और समर्थकों को बैठक में शामिल करने की मांग कर रहे थे। नगर पंचायत प्रशासन ने सरकारी नियमों का हवाला देते हुए इसका कड़ा विरोध किया। परिणामस्वरुप, पार्षदों ने एकजुट होकर बैठक का बहिष्कार कर दिया। घंटों चले मान-मनौव्वल के बाद, शाम में करीब 5:00 बजे बैठक सुचारू रूप से शुरू हो सकी। अध्यक्ष आशा गुप्ता ने प्रेस वार्ता में बताया कि बोर्ड ने भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। सोलर लाइट के लिए पूर्व में 4.5 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई सोलर लाइटों में धांधली और राशि के बंदरबांट के आरोपों की जांच ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) से कराने का बड़ा फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत हुए तालाब सौंदर्यीकरण कार्यों की भी उच्च स्तरीय कमेटी से जांच कराई जाएगी। वहीं जनता को बड़ी राहत मिली है जिसके तहत पानी और बुनियादी ढांचा के साथ ही आम नागरिकों की जेब का ख्याल रखते हुए कई रियायतें दी गई हैं।

पानी के नए कनेक्शन का शुल्क 4000 रुपये से घटाकर 3000 रुपये कर दिया गया है। अवैध पंप लगाकर पानी चोरी करने वालों पर 5000 रुपये से अधिक का जुर्माना लगेगा। प्रत्येक वार्ड में डीप बोरिंग, 3000 लीटर की पानी टंकी और 24 घंटे जलापूर्ति की योजना को मंजूरी मिली। साथ ही, गर्मी को देखते हुए चापाकलों की मरम्मत के आदेश दिए गए। कार्यक्षमता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रधान सहायक तमल कांति, लेखपाल पंकज रेखान सहित निर्णय लिया गया। वहीं दैनिक भत्ते पर कार्यरत कर्मचारी गौरीशंकर मंडल, राजीव मंडल, अजय कुमार, पिंटू मंडल, जितेन चंद्र और कोकण दास को भी उनके कार्यों से मुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया। वहीं सफाई कर्मियों के मानदेय वृद्धि के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया। शहर के चिल्ड्रन पार्क का नाम बदलकर अब विवेकानंद पार्क किया जाएगा, जहाँ जंग बहादुर सिंह की प्रतिमा स्थापित कर सौंदर्यीकरण किया जाएगा। अध्यक्ष आशा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि बोर्ड का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता और विकास की गति को तेज करना है, ताकि जामताड़ा की जनता को जवाबदेह प्रशासन मिल सके।
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