जामताड़ा
सात जन्मों का वादा और जीवन के अंतिम पड़ाव का सफर तलाक से होकर गुजरेगा ऐसा शायद ही किसी ने सोचा हो। जामताड़ा से एक ऐसा ही कुछ मामला सामने आया है, जिसने शादी जैसे पवित्र बंधन और सामाजिक मान्यताओं पर एक बार फिर सोचने को मजबूर कर दिया है। जिस उम्र में लोग नाती-पोतों के साथ जीवन की संध्या में शांति की तलाश करते हैं, उसी उम्र में 60 वर्ष से अधिक के एक बुजुर्ग दंपति ने अदालत के जरिए आपसी सहमति से अपने दशकों पुराने वैवाहिक रिश्ते को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। यह सुनने में आपको किसी फिल्मी कहानी के जैसा लग सकता है। चलिए, आगे पढ़ते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है।
नाती-पोतों के दौर में अंतिम पड़ाव पर पहुंचा रिश्ता
कहते हैं कि शादी सात जन्मों का बंधन होती है और जीवन के अंतिम पड़ाव में पति-पत्नी ही एक-दूसरे का सबसे बड़ा सहारा बनते हैं। लेकिन जामताड़ा में सामने आया यह मामला इस पारंपरिक धारणा को झकझोर देता है। कर्माटांड़ थाना क्षेत्र के रहने वाले अर्जुन और सोना ने जामताड़ा व्यवहार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। दोनों की उम्र 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है। उनके बेटा-बेटी बड़े हो चुके हैं और परिवार में नाती-पोते भी हैं, लेकिन वर्षों से चले आ रहे गहरे मनमुटाव ने आखिरकार उस रिश्ते को खत्म कर दिया, जिसे समाज अटूट मानता है।
न्यायालय के समझाने के प्रयास भी रहे विफल
दोनों ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13-B के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए जामताड़ा व्यवहार न्यायालय के फैमिली कोर्ट में आवेदन दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान फैमिली जज राजेश कुमार ने दोनों पक्षों को समझाने और मेडिएशन के जरिए रिश्ता बचाने की पूरी कोशिश की। अदालत का प्रयास था कि जीवन के इस पड़ाव पर आकर यह परिवार न बिखरे। लेकिन, जब सुलह के सभी प्रयास विफल हो गए, तो अदालत ने आखिरकार दोनों के वैवाहिक संबंध विच्छेद का कानूनी फैसला सुना दिया। फैसले के बाद अदालत परिसर का दृश्य बेहद भावुक करने वाला था। एक समय के जीवनसाथी बिना किसी बहस या शिकायत के अलग-अलग रास्तों पर चल पड़े।
अलग होने के पीछे की वजह
पति का पक्ष: पति अर्जुन का कहना है कि उनकी पत्नी वर्षों से अपने मायके में रह रही है और बार-बार बुलाने के बाद भी उनके साथ रहने को तैयार नहीं है।
पत्नी का पक्ष: वहीं पत्नी सोना का आरोप है कि पति हमेशा उनके साथ झगड़ा करते हैं और कोई काम-धंधा नहीं करते, इसलिए वह मायके में ही रहना बेहतर समझती हैं।
बुजुर्ग दंपति के अधिवक्ता चंद्रशेखर सिंह ने पुष्टि की कि दोनों ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13-B के तहत तलाक की अर्जी दी थी और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अदालत ने संबंध विच्छेद की अनुमति दे दी। .jpeg)
रिश्तों की बदलती तस्वीर का आईना
यह मामला सिर्फ तलाक की एक खबर नहीं है, बल्कि समाज में रिश्तों की बदलती तस्वीर को भी दर्शाता है। यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या यह आपसी असहमति की पराकाष्ठा है या फिर यह स्वीकार करने का साहस कि साथ रहकर रोज घुटने से बेहतर है अलग होकर शांति से जीना?