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टाटा जू की पहचान रही अफ्रीकी शेरनी 'जोया' का निधन, 16 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

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जमशेदपुर 
जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क की सबसे लोकप्रिय और लंबे समय तक आकर्षण का केंद्र रही अफ्रीकी शेरनी 'जोया' का निधन हो गया। सोमवार सुबह करीब 7:30 बजे 16 वर्ष से अधिक की उम्र में जोया ने अंतिम सांस ली। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण उसकी स्थिति लगातार बिगड़ रही थी। जू के पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा लगातार इलाज और निगरानी के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।जोया का आगमन और टाटा जू में उसकी लोकप्रियता
जू प्रबंधन के अनुसार, जोया को करीब छह माह की उम्र में दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया से भारत लाया गया था। उसके साथ 'जम्बो' और 'एड' नामक दो अन्य अफ्रीकी शेर भी टाटा जू पहुंचे थे। इसके बाद से वह लगातार टाटा जू की पहचान और आगंतुकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी रही। कैद (बाड़े) में रहने वाले शेरों की सामान्य औसत आयु की तुलना में उसने अपेक्षाकृत लंबा जीवन जिया। बताया गया कि पिछले कुछ दिनों से उसकी तबीयत खराब थी। पिछले दो दिनों के दौरान उसकी स्थिति और गंभीर हो गई। नाक से रक्तस्राव की शिकायत सामने आने के बाद उसे तत्काल गहन चिकित्सकीय देखरेख में रखा गया और लगातार उपचार शुरू किया गया। हालांकि, स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर सोमवार सुबह उसकी मृत्यु हो गई। 
शांत स्वभाव और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया
जू प्रशासन के अनुसार, जोया का स्वभाव बेहद शांत था और वह अपने बाड़े में अक्सर सक्रिय नजर आती थी। इसी कारण बच्चों, पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के बीच उसकी विशेष लोकप्रियता थी। वर्षों के दौरान वह केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि टाटा जू परिवार का अभिन्न हिस्सा बन गई थी। शेरनी की मौत के बाद निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत वन विभाग और पशुपालन विभाग को सूचना दी गई। इसके बाद वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम की मौजूदगी में शव परीक्षण कराया गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई।
पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट और मौत का कारण
पोस्टमार्टम में जू के पशु चिकित्सक डॉ. एम. पलित, डॉ. सुनील कुमार माहोर तथा पशुपालन विभाग, जमशेदपुर के पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कुंदन शामिल रहे। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) में तीव्र सूजन और बाइल डक्ट में अवरोध के कारण 'कार्डियो-पल्मोनरी फेल्योर' उसकी मौत की वजह माना गया है। हालांकि, अंतिम पुष्टि के लिए ऊतक और विसरा के नमूने सुरक्षित रखकर भुवनेश्वर स्थित कॉलेज ऑफ वेटरिनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री तथा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान आईवीआरआई भेजे जा रहे हैं। जोया का अंतिम संस्कार और जू निदेशक का वक्तव्य
शव परीक्षण के बाद टाटा जू परिसर में ही जोया का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों ने उसे श्रद्धांजलि दी और उसके साथ बिताए गए वर्षों को याद किया। इधर, टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क के निदेशक डॉ. नईम अख्तर ने कहा कि जोया काफी उम्रदराज हो चुकी थी और पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख के बावजूद उसकी मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा कि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि अपने 16 वर्षों के जीवनकाल में जोया लाखों पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी रही।
टाटा जू में अफ्रीकी शेरों की वर्तमान स्थिति
जोया के निधन के बाद टाटा जू में अब चार अफ्रीकी शेर बचे हैं। करीब तीन महीने पहले ही हैदराबाद के नेहरू जूलॉजिकल पार्क से एक नर और एक मादा अफ्रीकी शेर को टाटा जू लाया गया था। इससे पहले जू में दो नर अफ्रीकी शेर पहले से मौजूद थे। ऐसे में वर्तमान में जू में कुल चार अफ्रीकी शेर हैं, जिनमें तीन नर और एक मादा शामिल हैं।

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