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विधायक बने, लेकिन नहीं बदली घर की हालत; आज भी जयराम महतो के घर में टपकती है छत

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द फॉलोअप डेस्क
धनबाद जिले के तोपचांची प्रखंड स्थित मानताड़ गांव में एक ऐसा घर है, जिसकी दीवारें आज भी संघर्ष और सादगी की कहानी बयां करती हैं। यह घर किसी आम ग्रामीण का नहीं, बल्कि डुमरी विधायक जयराम महतो का पैतृक घर है। हैरानी की बात यह है कि विधायक बनने के करीब दो साल बाद भी गांव स्थित उनका खपड़ैल नुमा घर हल्की बारिश में टपकने लगता है। हाल ही में लगातार हुई बारिश के कारण घर का एक हिस्सा काफी जर्जर हो गया, जिसके बाद परिवार के लोग खुद उसकी मरम्मत करते नजर आए। जयराम महतो के पैतृक घर में आज भी उनकी बुजुर्ग दादी, मां और छोटे भाई का परिवार रह रहा है। मिट्टी की दीवारें, खपड़ैल की छत और बारिश के दौरान टपकता पानी गांव की सादगी और संघर्ष दोनों की तस्वीर पेश करता है। यह दृश्य लोगों को इसलिए भी चौंका रहा है क्योंकि आमतौर पर राजनीति में आने के बाद नेताओं की जीवनशैली बदल जाती है, लेकिन यहां परिवार अब भी उसी पुराने घर में रह रहा है।


रांची में सुविधा है, लेकिन गांव जैसा सुकून नहीं
घर की मरम्मत में जुटे श्रीराम महतो ने बताया कि विधायक जयराम महतो को रांची में बेहतर विधायक आवास मिला हुआ है, लेकिन गांव जैसा अपनापन और सुकून वहां नहीं मिलता। उनका कहना है कि गांव की मिट्टी, लोगों का प्रेम और इस घर से जुड़ी पुरानी यादें परिवार को आज भी यहां रहने के लिए प्रेरित करती हैं। जब जयराम महतो की बुजुर्ग दादी से इतने पुराने और टूटे-फूटे घर में रहने की वजह पूछी गई तो वह भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, बहुत मेहनत से यह घर बनवाए थे... इसी घर में जिंदगी बीती है। अब यही हमारा ठिकाना है। दादी की यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो उठे।


शादी के सवाल पर मुस्कुराए जयराम महतो
इस दौरान विधायक जयराम महतो से उनकी शादी को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए हल्के अंदाज में जवाब दिया कि “या तो खुद खोज लेंगे, नहीं तो समाज के लोग ही शादी करवा देंगे।” उनके इस जवाब पर आसपास मौजूद लोग भी मुस्कुराते नजर आए।


 

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