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जामताड़ा में अवैध कोयला परिवहन जारी, प्रशासनिक निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

जामताड़ा में अवैध कोयला परिवहन जारी, प्रशासनिक निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

जामताड़ा: 
Jamtara News:
जामताड़ा जिले के गोविंदपुर-साहेबगंज हाईवे पर नारायणपुर और मिहिजाम थाना क्षेत्र अवैध कोयला परिवहन के लिए कथित तौर पर सुरक्षित गलियारा बन चुके हैं। आरोप है कि प्रशासनिक चुप्पी के बीच इस मार्ग पर कोयला लदे ट्रकों का संचालन जारी है।

रात नौ बजे के बाद बढ़ जाती है ट्रकों की आवाजाही
इस हाईवे पर रात के अंधेरे में दर्जनों कोयला लदे ट्रक बिना किसी रोक-टोक के दौड़ रहे हैं। वहीं, संबंधित थानों और प्रशासनिक विभागों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। बुधवार शाम करीब आठ बजे नारायणपुर थाना क्षेत्र के पांडेयडीह के पास एक प्रशासनिक अधिकारी ने कार्रवाई करते हुए अवैध कोयला लदे एक ट्रक को पकड़ा। चालक मदन गोप के अनुसार, अधिकारी ने वाहन को रोककर उसके कागजात और ड्राइविंग लाइसेंस अपने कब्जे में ले लिए। इसके बाद ट्रक को एक पेट्रोल पंप संचालक की सुपुर्दगी में दे दिया गया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में खनिज परिवहन से जुड़े कथित अवैध कारोबार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

फर्जी चालान के सहारे कोयला परिवहन का आरोप
स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात नौ बजे के बाद इस हाईवे पर कोयला ढोने वाले वाहनों की आवाजाही अचानक बढ़ जाती है। कोयले के अवैध परिवहन में फर्जीवाड़े के भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि धनबाद से पश्चिम बंगाल भेजे जाने वाले इन वाहनों में बिहार के नालंदा और अन्य जिलों के कथित फर्जी चालान दिखाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

40 ट्रकों से कोयले की कथित अवैध खपत
सूत्रों के अनुसार, धनबाद की ओर से करीब 40 ट्रकों के माध्यम से कथित तौर पर अवैध कोयले की ढुलाई की जा रही है। इनमें से लगभग 25 ट्रक गिरिडीह के रास्ते बिहार की ओर, जबकि करीब 15 ट्रक जामताड़ा-मिहिजाम मार्ग से पश्चिम बंगाल की तरफ भेजे जा रहे हैं।

खनन टास्क फोर्स की निगरानी पर उठे सवाल
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर खनिज परिवहन हो रहा है, तो इसकी नियमित निगरानी कौन कर रहा है? स्थानीय स्तर पर चर्चाएं आम होने के बावजूद जिला खनन टास्क फोर्स और प्रखंड स्तरीय खनन टास्क फोर्स की कथित निष्क्रियता कई सवाल खड़े करती है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और खनन विभाग पर टिकी हैं। देखना होगा कि इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर खनिज के वास्तविक स्रोत, चालान और गंतव्य की सत्यता का पता लगाया जाता है या नहीं।

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