जीतेंद्र कुमार
विधानसभा में विधायकों के सवालों का जवाब किस तरह दिए जाते हैं,इससे सभी वाकिफ हैं। विधायकों के सवालों के जवाब किस तरह बनाए जाते हैं, इससे भी सभी वाकिफ हैं। अधिकारी, कर्मचारी, शीर्ष अधिकारी, विधायक, मंत्री, स्पीकर और मुख्यमंत्री, सभी। लेकिन आप नहीं जानते होंगे कि दूसरों के लिए आधा सच, आधा झूठ वाला जवाब बना कर खुश होने वाले को भी एक समय दुख होने की पीड़ा झेलनी पड़ती है। क्योंकि पुरानी कहावत है-बोए पेड़ बबूल के तो आम कहां से होए। जी हां, बजट सत्र में जवाब तैयार करने की यह कालाकारी, ऐसी दिखी जो उन्हीं को घायल कर गयी जो अक्सर दूसरों को घायल किया करते थे। सवाल झारखंड सचिवालय सेवा और झारखंड प्रशासनिक सेवा से जुड़े थे।
सचिवालय सेवा संघ से जुड़े सवाल में यह जानने की कोशिश की गयी थी कि सीएम की
स्वीकृति के बाद भी पद सृजन की प्रक्रिया कब पूरी होगी। इसी तरह झारखंड प्रशासनिक सेवा संवर्ग से जुड़ा सवाल दो पदों का समान वेतनमान होने से संबंधित था। विभाग में बैठे इन्हीं दोनों संवर्गों के अधिकारियों-कर्मचारियों ने ऐसा जवाब तैयार किया कि इन्हीं दोनों संवर्गों के कर्मियों को अपना सिर खुद ठोक लेना पड़ा। सवाल कुछ थे और जवाब कुछ और दे दिए गए। इसीलिए कहा गया है कि रोज रोज दूसरों की राह में रोड़े अटकाने वालों को भी एक दिन परेशान होना पड़ता है। लेकिन ये सब बातें अब सिर्फ कहने के लिए रह गयी हैं। यह शुभाषितानी एक औपचारिकता मात्र है। आप भी मजा लीजिए, पाठक भी और हम भी।
