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पूर्व मुख्य सचिव के कुक का बेटा भर्ती परीक्षाओं में कर रहा था धांधली, CID की जांच में चौंकाने वाला खुलासा

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द फॉलोअप डेस्क, रांची:

JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और अनियमितता की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। ताजा जानकारी मिली है कि पूर्व मुख्य सचिव कार्यालय में गोपनीय शाखा के संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार की भर्ती परीक्षाओं में धांधली में बड़ी भूमिका थी। CID की छानबीन में सामने आया है कि धर्मेंद्र के पिता झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव पीपी शर्मा के आवास पर रसोइया थे। पीपी शर्मा के कार्यकाल में ही धर्मेंद्र कुमार, मुख्य सचिव कार्यालय (गोपनीय शाखा) में संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर के बतौर बहाल हुआ था। यहीं उसने सचिवालय के प्रशासनिक ढांचे में पैठ बनाना शुरू किया और एल खियांग्ते के मुख्य सचिव रहते उनके दफ्तर की गोपनीय शाखा में कंप्यूटर ऑपरेटर रहने के दौरान अपने संपर्क और प्रभाव का दायरा बढ़ा लिया। 

यह भी जानकारी मिली है कि धर्मेंद्र अपने निजी प्रभावशाली संबंधों की धौंस जमाकर जिलाधिकारियों तक से अपना काम निकलवाया करता था।  

धर्मेंद्र ने की थी TDPL से कमीशन की मांग
CID ने अपनी जांच में पाया है कि वह धर्मेंद्र ही था, जिसने परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी TDPL से बड़ी मात्रा में कमीशन की सौदेबाजी की थी। TDPL को परीक्षा संचालन से जुड़े  काम दिलाने, मसलन- OMR शीट की स्कैनिंग, एडमिट कार्ड जारी करने और प्रश्न पत्रों  की प्रिंटिंग का काम दिलाने के एवज में उसने कंपनी से अधिकतम 25 लाख रुपये तक का कमीशन मांगा था। वह अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलकर उन्हें परीक्षा पास कराने का झांसा दिया करता था। TDPL के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर और JSSC-CGL के जरिए प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी बने अभय कुमार तिवारी से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर बीते 11 अगस्त को  CID ने धर्मेंद्र को गिरफ्तार किया था।

इसके बाद TDPL  के निदेशक रामवीर सिंह ने जांच अधिकारियों के सामने धर्मेंद्र की करतूतों का कच्चा-चिट्ठा खोल दिया। रामवीर ने CID को बताया कि धर्मेंद्र ने FRO और PCF परीक्षा में अपने कम से कम 12 चुनिंदा उम्मीदवारों का चयन करने का दबाव बनाया था। बात नहीं बनने पर पेपर लीक कराने को कहा था। 

TDPL के निदेशक से हुआ था धर्मेंद्र का झगड़ा
रामवीर के मुताबिक उन्होंने पेपर लीक कराने से मना किया और कहा कि आयोग के नियमानुसार ही काम होगा। रामवीर ने दावा किया कि मना करने पर धर्मेंद्र ने रवि नाम के शख्स के जरिए दबाव बनाया। रामवीर का आरोप है कि धर्मेंद्र उन्हें  खुद को सीएमओ का प्रभावशाली कर्मचारी बताकर झारखंड से बाहर करने और जेल भिजवाने की धमकी देता था।  रामवीर ने यह भी खुलासा किया है कि उसका धर्मेंद्र के साथ रांची के हिनू चौक पर झगड़ा हुआ था। रामवीर सिंह  के मुताबिक इसकी जानकारी आयोग के तात्कालीन चेयरमैन एल ख्यांगते और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को दी गई थी, लेकिन  एक्शन नहीं लिया गया। 

14वीं JPSC पीटी परीक्षा से खुला जांच का दायरा
गौरतलब है कि 14वीं JPSC सिविल सेवा की पीटी परीक्षा का परिणाम आने के बाद धांधली के आरोप लगे। सोशल मीडिया में OMR शीट वायरल हुए, जिसके आधार पर यह  आरोप लगाया गया कि कम अंक लाने वाले अभ्यर्थियों को चयनित घोषित किया गया। यह भी आरोप लगा कि सदस्यों के हस्ताक्षर के बिना ही रिजल्ट जारी किया गया। पीटी परीक्षा का कटऑफ और ऑंसर की जारी नहीं किया गया। झारखंड में JPSC-JSSC की भर्ती परीक्षाओं की जांच और रिफॉर्म की मांग को लेकर 26 दिन तक आंदोलन चला। सरकार ने 14वीं JPSC सिविल सेवा और JSSC-CGL समेत 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने JSSC-CGL और FSO समेत कुछ भर्तीी परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक लगा दी और मामला विचाराधीन है। 

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