द फॉलोअप, रांची
प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा के अधीक्षक चंद्रशेखर के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को फिर लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि कुछ ही समय पूर्व मैंने आपको बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होटवार) में काराधीक्षक द्वारा एक असहाय महिला कैदी के यौन शोषण और उसे गर्भवती किए जाने के जघन्य प्रकरण पर एक विस्तृत पत्र लिखा था। मुझे यह देखकर घोर निराशा और क्षोभ हुआ कि उस पत्र के माध्यम से इतनी गंभीर बातें संज्ञान में लाए जाने के बावजूद, आपकी सरकार और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई कर दोषियों को दंडित करने की बजाय, पूरी निर्लज्जता के साथ इस मामले को जल्द से जल्द रफा-दफा करने और साक्ष्यों को दफनाने में अपनी पूरी शासकीय ताकत झोंक दी। राज्य के कारागारों में जो यह अनैतिक और आपराधिक खेल आपकी नाक के नीचे धड़ल्ले से चल रहा है, उसे देखकर अब यह स्पष्ट प्रतीत होने लगा है कि इन वर्दीधारी अपराधियों को शायद आपका और आपके शीर्ष तंत्र का सीधा आशीर्वाद और संरक्षण प्राप्त है। पत्र के साथ बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पीडीएफ फॉर्म में कुछ आवश्यक दस्तावेज भी सौंपे हैं।

आज यह मानना ही पड़ेगा कि बिरसा मुंडा कारागार में आपने तथाकथित "सुविधाएं" देने के लिए ऐसे अधिकारियों की टोली तैनात कर रखी है, जो स्वयं ही अपराध, व्यभिचार और सत्ता के दुरुपयोग के प्रतीक बन चुके हैं। जिस काराधीक्षक (कुमार चंद्रशेखर) पर महिला कैदी को गर्भवती करने के गंभीर आरोप हैं, उसके साथ-साथ अब जिस जेलर लवकुश कुमार के कुकृत्य सामने आ रहे हैं, उसकी कहानी तो उससे भी अधिक शर्मनाक और भयावह है। जेलर लवकुश कुमार वर्षों से अपनी वर्दी, पद और सत्ता के रौब का दुरुपयोग कर महिलाओं का घोर शोषण करने का आदी रहा है। यह कोई साधारण चरित्रहीनता का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी पद की ताकत का इस्तेमाल कर महिलाओं को डराने, दबाने और उनका जीवन बर्बाद करने का एक संगठित संस्थागत अपराध है। मेरे समक्ष एक पीड़ित परिवार की जो व्यधा आई है, यह आपके शासन की कानून-व्यवस्था का जनाज़ा निकालती है। सत्ता के नशे में चूर इस जेलर ने एक महिला गृह रक्षक (होमगार्ड) के साथ अनैतिक संबंध बनाए और उसकी पूरी जिंदगी तबाह कर दी। जब उस महिला के पति ने इसका विरोध किया, तो उसे रास्ते से हटाने के लिए गुंडे भेजे गए, जान से मारने की धमकियां दी गईं और झूठे मुकदमों में फँसाने का भय दिखाकर वर्षों तक उस महिला का शारीरिक और मानसिक शोषण किया जाता रहा।

चतरा कारागार में रहते हुए इस जेलर के सिर पर सत्ता का ऐसा वीभत्स नशा चढ़ा था कि कानून और न्याय की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई गईं। जिस महिला ने स्वयं कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न झेला, उसी बेबस महिला को डरा-धमका कर "कार्यस्थल पर महिला उत्पीड़न समिति" का सदस्य बना दिया गया ताकि फाइलों में 'शून्य शिकायत' का पर्दा डाला जा सके। इससे बड़ा मज़ाक महिला सुरक्षा, कानून और न्याय के साथ और क्या हो सकता है? उस पीड़ित महिला के पति और भाई ने आपसे लेकर शासन के तमाम आला अधिकारियों तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन आपके पूरे तंत्र ने पीड़ित परिवार की रक्षा करने के बजाय आरोपी जेलर की ढाल बनकर काम किया। इससे भी अधिक शर्मनाक और पीड़ादायक तथ्य यह है कि बिरसा मुंडा कारागार के अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर ने इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय, उस पीड़ित पति को चंद रुपयों की रिश्वत लेकर अपनी पत्नी का यौन शोषण "सहन" करने की घिनौनी सलाह दी। यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि आपकी पूरी सरकार और व्यवस्था के गहरे नैतिक पतन का सबसे बड़ा प्रमाण है।

लवकुश कुमार के कारनामों की सूची यहीं समाप्त नहीं होती; इसके विवाह से पूर्व एक महिला द्वारा इसके घर पहुँचकर अपने और इसके नाजायज़ बच्चे को लेकर हंगामा करने की चर्चाएँ भी लंबे समय से सार्वजनिक रही हैं। प्रश्न यह उठता है कि आखिर ऐसे चरित्रहीन और आपराधिक आचरण वाले व्यक्ति को कारागार जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी किसके संरक्षण में दी गई है? मुख्यमंत्री जी, यह कोई निजी या घरेलू विवाद नहीं है। यह एक जेलर और काराधीक्षक द्वारा अपने पद, सत्ता और वर्दी का इस्तेमाल कर महिला कर्मियों एवं कैदियों के यौन शोषण, धमकी, भय और भ्रष्टाचार का एक खुला संगठित अपराध है जो आपके साये में फल-फूल रहा है। मैं अभी इनके कुकृत्यों की केवल एक छोटी सी झलक ही सार्वजनिक कर रहा हूँ। बाकी अत्यंत गंभीर दस्तावेज, प्रमाण और शिकायतें अलग से प्रेषित की जा रही हैं। यदि आपके भीतर तनिक भी नैतिक उत्तरदायित्व और लोक-लाज शेष है, तो ऐसे दागी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच बैठाई जाए और इन्हें सीधे जेल भेजा जाए।
