द फॉलोअप डेस्क, रांची:
मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर 2 चुनाव आय़ुक्तों द्वारा कथित मनमानी के आरोपों पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का पक्ष सामने आया है। झारखंड के देवघर में एक अस्पताल के उद्घाटन के सिलसिले में पहुंचे हिमंता बिस्वा सरमा ने मीडिया से कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के मसले पर टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसका एक तय ढांचा है। हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि चुनाव आयोग का अंदरुनी ढांचा वहां उत्पन्न मसलों को सुलझाने में खुद सक्षम है। हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि आखिरकार यह एक समाचार रिपोर्ट में उल्लिखित है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि एक संवैधानिक संस्था के मसले पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।

चुनाव आयोग के मसले पर विपक्ष को गलत कहा
इस मौके पर हिमंता बिस्वा सरमा ने विपक्ष को भी आड़े हाथों लिया। राहुल गांधी पर तंज करते हुए हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि जो भी संस्था ईमानदारी से अच्छा काम करती है, विपक्ष उसे दबाने का प्रयास करने लगता है। उन्होंने कहा कि जब कोई संवैधानिक संस्था विपक्ष के ईशारों पर चलने से मना करती है तो विपक्ष उसे दबाने का षड्यंत्र करने लगता है। उन्होंने केंद्रीय निर्वाचन आयोग से जुड़े मसले पर विपक्ष की प्रतिक्रिया को गलत कहा है।
अंग्रेजी समाचार पत्र की रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा
गौरतलब है कि इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं का नाम काटने और सूची में नए नाम जोड़ने के तरीकों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मनमाने तरीके से फैसले लेने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया है कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीने में 14 बार मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कामकाज पर लिखित में आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन उनकी शिकायतों पर सुनवाई नहीं हुई।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि दोनों चुनाव आय़ुक्तों ने आरोप लगाया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त महत्वपूर्ण फैसलों पर उनकी राय नहीं लेते और कई निर्णय उनको अंधेरे में रखकर लिए गये।
.jpeg)
समाचार रिपोर्ट पर गरमा गई है देश की सियासत
रिपोर्ट में किए गये दावों के आधार पर विपक्ष ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी है। विपक्ष, लोकसभा समेत कई राज्यों के विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग कर रहा है। वहीं, बीजेपी ने इसे चुनावी हार स्वीकार नहीं कर पाने पर अनर्गल प्रलाप कहा है। इस बीच देवघर में हिमंता बिस्वा सरमा ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयोग और चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेद पर सीधी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए विपक्ष पर एक संवैधानिक संस्था को दबाने का षड्यंत्र करने का आरोप लगाया है।