द फॉलोअप डेस्क
पूर्व मुख्यमंत्री सह प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक लंबा चौड़ा पत्र लिखा है। पूरे दस्तावेजी प्रमाण के साथ बाबूलाल मरांडी ने इस पत्र में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से शैक्षणिक सत्र 2025-26 में मेडिकल MBBS कोर्स में नामांकन की पूरी प्रक्रिया को रद्द करते हुए पुनः कॉउन्सिलिंग कराने और अनियमितता में सलिप्त अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त करते हुए पूरे प्रकरण की सीबीआई (C.B.I) जांच कराने की मांग की है। बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों के नामांकन प्रक्रिया में JCECEB (Jharkhand Entrance Competitive Examination Board) द्वारा शैक्षणिक सत्र 2025-26 में घोर अनियमितता बरती गई, जिसके फलस्वरूप विभिन्न श्रेणियों के योग्य एवं मेधावी अभ्यर्थी नामांकन कराने से वंचित हो गए। इस शैक्षणिक वर्ष में नामांकन प्रक्रिया में हुई धाँधली की शिकायतें अखबारों में प्रमुखता से छपी हैं और JCECEB द्वारा यह स्वीकार भी किया गया है कि नामांकन प्रक्रिया में आरक्षित कोटि एवं अनारक्षित कोटि में अभ्यिार्थियों के नामांकन में गड़बड़ियाँ हुई हैं एवं अरोपी अभ्यिार्थियों के नामांकन को रोक दी गई। द फॉलोअप ने भी 29 नवंबर को MBBS- काउंसिलिंग में भारी गड़बड़ी, JCECEB ने नहीं किया NTA के डाटा का सही उपयोग, शीर्षक से भ्रष्टाचार को उजागर किया था।

मरांडी ने हेमंत सोरेन से कहा है-आपको अवगत कराना चाहूँगा कि जब गड़बड़ियों का अंदेशा अभ्यर्थियों को लगा तब कुछ अभ्यर्थियों ने JCECEB को आवेदन देकर नामांकन प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों के जाँच की माँग की। तत्पश्चात परिवाद पत्र के आलोक में स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा दिनांक 19.11.2025 को अबु इमरान, प्रबंध निदेशक JMHIDPCL की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित कर नामांकन हेतु अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत जाति एवं आवासीय प्रमाणपत्रों की जाँच का जिम्मा सौंपा एवं प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में यह स्पष्ट है कि 03 अभ्यर्थियों (I) सुचारिता दास (II), काजल (III), भिवानी का जाति एवं निवासी प्रमाण पत्र गलत पाया गया, जिनका प्रमाण पत्र उपायुक्त गोड्डा एवं गिरिडीह द्वारा निर्गत किया था। साथ ही छह अभ्यर्थियों जिनका JCECEB द्वारा मेडिकल कॉलेजों में नामांकन हेतु सीटें आवंटित कर दी गई, इनका भी जाति एवं निवासी प्रमाण-पत्र फर्जी तरीके से बना था, जो राज्य से बाहर के रहने वाले हैं। जाँच प्रतिवेदन में कमिटी द्वारा MCC (मेडिकल कॉउंसेलिंग कमिटी) द्वारा निर्धारित शर्त (NEET(UG) 2025 में नामांकन हेतु परीक्षा आयोजित करानेवाली एजेन्सी N.T.A (National Testing Agency) से JCECEB को API-LINK के माध्यम से Data Sharing किए जाने का परामर्श दिया गया, जो MCC के गाईडलाइन के अनुसार जरूरी है लेकिन JCECEB ने Data Sharing किए बगैर जानबुझकर गड़बड़ियाँ करने के उद्देश्य से यह गलत कार्य को अंजाम दिया। अन्त में निष्कर्ष के तौर पर जाँच कमिटी द्वारा यह कहा गया है कि प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए सभी अभ्यर्थियों तथा इस मामले में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की विस्तृत जाँच किसी निष्पक्ष जाँच एजेन्सी से कराए जाने की अनुशंसा की गई है लेकिन विभाग द्वारा अभी तक जाँच कराने हेतु कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
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आप अवगत भी होंगे कि राष्ट्रीय स्तर पर देश के सभी सरकारी/निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS/BDS में नामांकन हेतु NEET परीक्षा जो NTA द्वारा आयोजित किया जाता है। इस शैक्षणिक सत्र 2025-26 में नामांकन हेतु फार्म भरने की अंतिम तिथि 7 मार्च 2025 थी और परीक्षा 5 मई 2025 को ली गई एवं परीक्षाफल का प्रकाशन 14 जून 2025 को हुआ एवं परीक्षाफल JCECEB (Jharkhand Entrance Competitive Examination Board) राँची को भेज दिया गया। परीक्षाफल के आधार पर JCECEB Counselling करके rank के अनुसार अभ्यर्थियों को MBBS/BDS में नामांकन हेतु कॉलेज आवंटित करती हैं।
MCC (मेडिकल कॉउसिंलिग कमिटी) के गार्डलाईन के अनुसार JCECEB को Counselling करना है, MCC के गार्डलाईन क्रमांक 9 में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि अभ्यर्थी अपनी कोई भी सूचना यथा शैक्षणिक, जाति प्रमाण पत्र/आवासीय प्रमाण पत्र इत्यादि की सूचना में आवेदन की अंतिम तिथि यानी 7 मार्च 2025 के बाद परिवर्त्तन नहीं कर सकते हैं। आवेदन करते समय जो सूचना NTA को दी गई है Counselling के समय वही माना जाएगा। MCC के गार्डलाईन की छाया प्रति आपके सुलभ संदर्भ हेतु संलग्न (अनुलग्नक-2) है, लेकिन JCECEB द्वारा MCC के गार्डलाईन को दरकिनार कर NTA से JCECEB को बिना लिंक किए Counselling किया गया ताकि नामांकन प्रक्रिया में गड़बड़ी की जा सके एवं यह जानबूझकर की गई।

JCECEB के Adv 28/25-41 दिनांक 15.7.2025 के अनुसार झारखण्ड कोटे से आरक्षित सीटों पर प्रवेश पाने के लिए अभ्यर्थी का झारखण्ड निवासी होना अनिवार्य है, निवासी की होने का निर्धारण झारखण्ड सरकार द्वारा दिनांक 18.4.2016 द्वारा निर्गत संकल्प के अनुसार है जिसमें वर्ष 1985 को cut off वर्ष माना गया है, लेकिन इन स्थापित नियमों की अनदेखी कर JCECEB ने बहुत अभ्यर्थियों को मेडिकल कॉलेजों में आवंटित कर दी। MCC 2025 के सूचना मार्ग निर्देश्किा के क्लॉज 9 एवं 11 तथा JCECEB द्वारा अधिसूचित निर्देश प्रति पत्रांक 28/25-41 के अनुसार फार्म भरने (Apply) के बाद जन्मतिथि स्थानीयता, जाति श्रेणी में किसी भी प्रकार का बदलाव स्वीकार्य नहीं होगा। फिर भी JCECEB ने 14.6.25 को परीक्षा परिणाम आने के बाद अभ्यर्थियों के परिवर्त्तित दस्तावेज स्वीकार कर लिए एवं उसका लाभ उठाते हुए कई अभ्यर्थियों ने अपने श्रेणी बदल ली यहाँ तक कि समामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी भी आरक्षित कोटे में नामांकन ले लिए एवं दूसरे आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी भी SC/ST श्रेेणी में नामांकन करा लिए।

आपको उदाहरण के तौर पर कुछ अभ्यर्थियों का नाम बताना चाहता हूँ, जिन्होंने फर्जी तरीके से जाति एवं निवास प्रमाण-पत्र बनाकर विभिन्न कॉलेजों में नामांकन हेतु सीटें आवंटित करा ली, जो इस प्रकार हैं:-
(I) आशीष कुमार और पुष्पम कुमारी, दोनो भाई-बहन हैं। इनके पिता मन्टू प्रसाद मंडल पीरपैंती (भागलपुर) बिहार के हैं। इनके पिता ने वर्ष 2000 में साहेबगंज जिला के गाँधीनगर (मिर्जाचौकी) में जमीन खरीदकर घर बना लिया एवं जाति प्रमाण पत्र एवं निवासी प्रमाण पत्र जुलाई महीने में साहेबगंज जिला से बनाकर ST श्रेणी का लाभ लेकर RIMS नामांकन ले लिया जबकि 1985 के बाद झारखण्ड में निवास करनेवाले व्यक्ति न तो निवासी प्रमाण पत्र बना सकता है और न ही जाति प्रमाण पत्र, लेकिन अधिकारियों से मिलीभगत कर दोनों प्रमाण पत्र बना लिए, जो संलग्न है। (अनुलग्नक -4) आधार कार्ड में स्पष्ट रूप से दिखता है कि ये बिहार के निवासी हैं। (II) भाविनी, पिता रूपेश कुमार जो दिल्ली के रहनेवाले हैं, लेकिन गिरिडीह जिला से जाति प्रमाण पत्र बनवाकर SC श्रेणी में नामांकन हजारीबाग स्थित मेडिकल कॉलेज में करा लिया। उन्होंने अपना निवासी प्रमाण पत्र एवं जाति प्रमाण पत्र 16.08.2025 को गिरिडीह जिला से बनवाकर ST श्रेणी में seatआवंटन करा लिया।
(iii) अंकित आनन्द, जिनका score card में केटेगरी रैंक 82869 था, All India केटेगरी ST रैंक मे 67234 इससे स्पष्ट होेता है कि कैटेगरी परिवर्त्तन कर लिया।
(IV) पप्पू सिंह आवेदन करते समय ST में था, लेकिन 7.11.2025 को ST दिब्यांग का प्रमाण पत्र बनवाकर RIMS नामांकन करा लिया।
(V) सुचारिता दास, ने भी गोड्डा जिला से दिनांक 1 नवम्बर, 2025 को निवास प्रमाण पत्र एवं दिनांक 4 नवम्बर, 2025 को जाति प्रमाण पत्र बनवाकर धनबाद मेडिकल कॉलेज में Seat Allowt करा लिया। जाँच मे पकडे़ जाने पर Admission रोक दिया गया।
(VI) काजल पर यही आरोप है जिन्होने गिरिडीह जिला से फर्जी जाति एवं निवासी प्रमाण पत्र बनवाकर RIMS में Seat आवंटन कर लिया, लेकिन जाँच में पकड़े जाने पर नामांकन नहीं करा सकी।

इसी तरह अन्य अभ्यर्थी यथा, मेघा कुमारी, चाहत राज, जितेद्र कुमार, सागर कुमार, ज्योति राज एवं मनिष राज ने Counselling के समय फर्जी जाति प्रमाण एवं निवासी प्रमाण पत्र बनवाकर मेडिकल कॉलेजो में Seat आवंटित करा लिया लेकिन जाँच में पकड़े जाने के डर से इन अभ्यर्थियों ने नामांकन नही कराया। इससे स्पष्ट रूप से पता चलता है कि JCECEB के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एक बड़ी सजिश कर झारखण्ड के मूल अभ्यर्थियों के साथ अन्याय कर झारखण्ड से बाहर के अभ्यर्थियों को लाभ पहुँचाया।
नियम है कि Admission हेतु JCECEB द्वारा Counselling करते समय JCECEB के पोर्टल को NTA के Portal सेे Linking होना चाहिए था ताकि अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन करते समय दी गई सभी वास्तविक जानकारी स्वतः सत्यापित हो सके। JCECEB के पत्रांक 28/25 1251 में परीक्षा नियंत्रक मेघा भारद्वाज द्वारा यह स्वीकार भी किया गया है कि Counselling के समय अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों/दस्तावेजों की कोई जाँच नहीं की गई और यह जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेजो को दी गई है, जबकि सीटें Counselling के समय ही JCECEB ने आवंटित कर दी थी। (अनुलग्नक-6)
अतएव JCECEB (झारखण्ड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगी परीक्षा पर्षद) के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों की मिलीभगत से मेडिकल कॉलेजो में नामांकन प्रक्रिया में हुई भारी अनियमितता को देखते हुए आपसे माँग करता हूँ कि
(I) JCECEB के दोषी अधिकारियों को निलम्बन/बर्खास्त करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाय।
(II) JCECEB द्वारा Counselling के आधार पर जारी परिणाम को रद्द कर सही प्रक्रिया अपनाकर पुनः Counselling कराकर सीटें आवंटित की जाय एवं
(III) इस पूरे षडयंत्र (मेडिकल नामांकन) में हुई घोटाले एवं भारी अनियमितता की सी.बी.आई (C.B.I) से जाँच कराई जाय ताकि झारखण्ड के अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो सके एवं इस बड़े भ्रष्टाचार में सम्मिलित दोषियों को कड़ी सजा मिल सके।
