रांची
झारखंड में इस समय एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। इस बीच सीएम हेमंत सोरेन ने बड़ा खुलासा किया है। सोरेन ने कहा है कि 30% नामों में लॉजिकल गड़बड़ियां देखी गई हैं और 2003 के लिस्ट में नाम नहीं होने से लाखों आदिवासी वोटर वोट से वंचित रह सकते हैं। सीएम की आशंका तब आई है जब झारखंड जनाधिकार महासभा ने दावा किया कि राज्य के आदिवासी बहुल इलाकों में लगभग हर पोलिंग बूथ पर करीब 30 प्रतिशत वोटरों के नाम SIR सूची में "लॉजिकल गड़बड़ियों" के दायरे में आ रहे हैं। संगठन का आरोप है कि बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता भी हैं, जिनके पूर्वजों के नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं हैं। इस स्थिति में लाखों आदिवासी मतदाताओं के मतदान अधिकार से वंचित होने की आशंका जताई गई है।
बड़ी संख्या में पात्र मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं
संगठन का कहना है कि यदि इन गड़बड़ियों का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में पात्र मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं। संगठन ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और सभी पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की मांग की है। इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सभी उपायुक्तों को अहम निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि जानकारी के अभाव में कोई भी नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रह जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि गणना प्रपत्र भरने की सही जानकारी प्रत्येक घर तक पहुंचाई जाए तथा सभी BLO को लगातार प्रशिक्षण और संवेदनशीलता (सेंसिटाइजेशन) प्रदान किया जाए।
दस्तावेजों और समय-सीमा को लेकर किसी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए
सीएम सोरेन ने कहा कि नागरिकों को गणना प्रपत्र, आवश्यक दस्तावेजों और समय-सीमा को लेकर किसी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए। इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान लगातार चलाया जाए। साथ ही बुजुर्गों, दिव्यांगजनों, दूरस्थ क्षेत्रों के निवासियों, आदिवासी समुदायों और राज्य से बाहर रह रहे झारखंडियों तक भी आवश्यक सूचना पहुंचाने के विशेष प्रयास किए जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि BLO नागरिकों के साथ विनम्र, सम्मानजनक और सहयोगात्मक व्यवहार करें तथा प्रत्येक पात्र मतदाता को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।