हजारीबाग:
हजारीबाग कैंटोनमेंट मौजा स्थित खास महल की 50 डिसमिल जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर एक बार फिर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव का नाम सामने आया है। सदर सीओ आशुतोष कुमार के नेतृत्व में प्रशासन ने शुक्रवार को लगातार पांचवीं बार कार्रवाई करते हुए जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू की। प्रशासन के अनुसार, यह जमीन खास महल की सरकारी भूमि है, जिस पर किसी भी तरह का अतिक्रमण या अनधिकृत निर्माण स्वीकार्य नहीं है। हालांकि, जमीन पर अधिकार को लेकर पूर्व मंत्री के पक्ष की ओर से दस्तावेज और पावर ऑफ अटॉर्नी का हवाला दिया जाता रहा है। ऐसे में बार-बार हो रही कार्रवाई के बीच जमीन के स्थायी सीमांकन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

पांचवीं बार क्यों करनी पड़ी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई?
कैंटोनमेंट मौजा की इस जमीन पर प्रशासन पहले भी कई बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर चुका है। इसके बावजूद दोबारा कब्जे या घेराबंदी की स्थिति बनने से प्रशासन को शुक्रवार को पांचवीं बार जेसीबी चलानी पड़ी। इस कार्रवाई के बाद अब सवाल उठ रहा है कि बार-बार अतिक्रमण हटाने के बजाय जमीन की स्थायी सुरक्षा और सीमांकन क्यों नहीं सुनिश्चित किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जमीन सरकारी है, तो प्रशासन को उसका स्पष्ट सीमांकन कराकर सरकारी भूमि का बोर्ड लगाना चाहिए। साथ ही, जरूरत के अनुसार चारदीवारी या अन्य स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण की स्थिति उत्पन्न न हो और प्रशासन को बार-बार कार्रवाई नहीं करनी पड़े।
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जमीन के अधिकार को लेकर प्रशासन और पूर्व मंत्री पक्ष के दावे अलग
इस 50 डिसमिल जमीन को लेकर पिछले कुछ समय से प्रशासन और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के पक्ष के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है। पूर्व मंत्री की ओर से जमीन पर अधिकार से संबंधित दस्तावेज और पावर ऑफ अटॉर्नी का हवाला दिया जाता रहा है। वहीं, प्रशासनिक रिकॉर्ड में इस जमीन को खास महल की सरकारी भूमि बताया जा रहा है। जमीन के स्वामित्व और अधिकार को लेकर दोनों पक्षों के दावों के बीच प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में जमीन पर किसी भी पक्ष के दावे का अंतिम निपटारा संबंधित कानूनी और राजस्व प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है।
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796.17 एकड़ खास महल जमीन का हो रहा सर्वे
हजारीबाग जिले में खास महल की जमीन को लेकर प्रशासन व्यापक स्तर पर सर्वे और अभिलेखों की जांच कर रहा है। जिले के विभिन्न मौजों में खास महल भूमि की स्थिति, कब्जे, लीज और अन्य राजस्व अभिलेखों की जांच की प्रक्रिया चल रही है। इसी क्रम में शहर के 22 मौजा में करीब 796.17 एकड़ खास महल जमीन के सर्वे किए जाने की जानकारी सामने आई है। कैंटोनमेंट मौजा की 50 डिसमिल जमीन का मामला इसी व्यापक अभियान के बीच महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि यहां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बार-बार दोहराई जा रही है।
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अब स्थायी सीमांकन और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर
पांचवीं बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद अब प्रशासन के सामने जमीन को स्थायी रूप से सुरक्षित रखने की चुनौती है। स्थानीय लोगों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि कार्रवाई के बाद जमीन पर दोबारा कब्जे या घेराबंदी की कोशिशों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराना है। वहीं, पूर्व मंत्री योगेंद्र साव से जुड़े दावों और जमीन के अधिकार को लेकर चल रहे विवाद के कारण कैंटोनमेंट मौजा की यह 50 डिसमिल खास महल जमीन स्थानीय स्तर पर लगातार चर्चा में बनी हुई है।