हजारीबाग
हजारीबाग में न्याय की मांग को लेकर एक अनोखा आंदोलन होने जा रहा है। बड़ा अखाड़ा के महंत विजयानंद दास ने ऐलान किया है कि 181 वर्षों बाद भगवान की विग्रह मूर्ति मंदिर से बाहर निकलेगी और न्याय की गुहार लगाने समाहरणालय पहुंचेगी। महंत का आरोप है कि वर्षों से न्यायालय और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला है। हजारीबाग के बड़ा अखाड़ा परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में महंत विजयानंद दास ने वर्तमान न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 से वे न्यायालय, समाहरणालय और अंचल कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही है।

र्याप्त साक्ष्य देने के बावजूद कोई एफआईआर दर्ज नहीं
महंत ने आरोप लगाया कि मृत व्यक्तियों के नाम पर जमाबंदी ऑनलाइन चढ़ाकर एलपीसी जारी की जा रही है और उसी के आधार पर करोड़ों रुपये मूल्य की जमीनों की खरीद-बिक्री हो रही है। उन्होंने दावा किया कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों में बिना सक्षम पदाधिकारी के हस्ताक्षर के जमाबंदी किए जाने का उल्लेख है। महंत का कहना है कि सीमांकन कराने में तीन वर्ष बीत गए, फिर भी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। वहीं जांच रिपोर्ट आने में भी महीनों और वर्षों का समय लग रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन माफियाओं और दलालों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य देने के बावजूद कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है।
.jpeg)
विग्रह मूर्ति के साथ पदयात्रा
महंत विजयानंद दास ने घोषणा की कि 15 जून सोमवार को दोपहर 12 बजे बड़ा अखाड़ा से भगवान की विग्रह मूर्ति के साथ पदयात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा समाहरणालय पहुंचेगी जहां वरीय अधिकारियों से न्याय की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक भगवान मंदिर में वापस नहीं विराजेंगे, बल्कि जन-जन के बीच जाकर लोगों को जागरूक करेंगे। 181 वर्षों बाद भगवान की विग्रह मूर्ति का मंदिर से निकलकर न्याय की मांग के लिए प्रशासन के दरवाजे तक पहुंचना पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें 15 जून को होने वाले इस अनोखे आंदोलन पर टिकी हैं।
.jpg)