हजारीबाग:
जेल की ऊंची दीवारें और बंद दरवाजे अक्सर सख्ती और पाबंदियों की कहानी बयां करते हैं, लेकिन हजारीबाग सेंट्रल जेल में एक दिन ऐसा भी आया, जब इन्हीं दीवारों के बीच मातृत्व, ममता और अपनापन देखने को मिला। दरअसल, हजारीबाग सेंट्रल जेल के महिला वार्ड में एक नवजात शिशु के जन्म के छठे दिन छठियारी यानी छठी पूजन का आयोजन किया गया। जेल प्रशासन और साथी महिला बंदियों ने मिलकर इस मौके को खास बनाया। फूलों और रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजे वार्ड में सोहर और मंगल गीत गूंजे। कुछ समय के लिए जेल का माहौल ऐसा हो गया, जैसे किसी परिवार में बच्चे के जन्म का उत्सव मनाया जा रहा हो।
साथी महिला बंदियों ने सोहर और मंगल गीत गाकर दिया आशीर्वाद
छठियारी पूजन के दौरान महिला बंदियों ने पारंपरिक सोहर और मंगल गीत गाए। उन्होंने नवजात शिशु के स्वस्थ जीवन और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उसे आशीर्वाद दिया। महिला वार्ड को फूलों और रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया था, जिससे पूरे परिसर में उत्सव का माहौल बना रहा। इस आयोजन के जरिए साथी महिला बंदियों ने नवजात और उसकी मां के साथ खुशी साझा की। जेल की सीमाओं के भीतर आयोजित यह कार्यक्रम आपसी सहयोग और मानवीय संवेदनाओं का उदाहरण बना।
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जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की कराई गई जांच, दिए कपड़े और खिलौने
कार्यक्रम के दौरान कारा अधीक्षक, जेलर और जेल प्रशासन की ओर से जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की जांच भी कराई गई। नवजात शिशु को नए कपड़े और खिलौने उपहार में दिए गए। जेल प्रशासन की इस पहल से मां और बच्चे के चेहरे पर खुशी नजर आई। इस अवसर पर मौजूद लोगों ने भी भावनात्मक जुड़ाव महसूस किया। आयोजन ने महिला वार्ड के माहौल को आत्मीयता और अपनापन से भर दिया।
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अधीक्षक और जेलर ने खुद परोसा विशेष भोजन
छठियारी के अवसर पर महिला बंदियों के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था की गई थी। कारा अधीक्षक सीएस सुमन और जेलर ने स्वयं भोजन परोसकर कार्यक्रम में भागीदारी निभाई। जेल प्रशासन की इस पहल ने आयोजन को और अधिक आत्मीय बना दिया। जेल की चारदीवारी के भीतर आयोजित यह छोटा-सा उत्सव मां और नवजात के लिए यादगार पल बन गया। साथी महिला बंदियों की भागीदारी और प्रशासन के सहयोग से छठियारी का कार्यक्रम पारिवारिक माहौल में संपन्न हुआ।