द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच गुरुवार 21 मई 2026 को रांची में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इस दौरान करीब 27 उग्रवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। आत्मसमर्पण करने वालों में गुमला जिले के दो सक्रिय नक्सली भी शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि इन दोनों के सरेंडर के बाद गुमला जिला पूरी तरह नक्सलमुक्त हो गया है। गुमला के पुलिस अधीक्षक हारीश बिन जमा ने कहा कि जिले में लगातार चलाए गए नक्सल विरोधी अभियान, सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति का सकारात्मक असर अब साफ तौर पर दिखने लगा है। उन्होंने दावा किया कि गुमला अब नक्सल प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास योजना के तहत लाभ दिया जाएगा, ताकि वे सामान्य जीवन में वापस लौट सकें।

5 लाख का इनामी नक्सली लिपिन बैद ने डाला हथियार
गुमला पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में पांच लाख रुपये का इनामी नक्सली लिपिन बैद उर्फ युजिन बैद भी शामिल है। वह गुमला जिले के घाघरा थाना क्षेत्र के अंबाकोना गांव का निवासी बताया गया है। नक्सली संगठन में उसकी सक्रिय भूमिका रही थी और उस पर कई उग्रवादी मामलों में शामिल होने के आरोप हैं। लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी थीं। आत्मसमर्पण करने वाले दूसरे नक्सली की पहचान श्रवण गोप के रूप में हुई है, जो गुमला थाना क्षेत्र के कलीगा गांव का रहने वाला है। बताया जा रहा है कि वह भी लंबे समय से उग्रवादी संगठन से जुड़ा हुआ था। दोनों नक्सलियों के सरेंडर को पुलिस बड़ी उपलब्धि मान रही है और इसे गुमला में शांति बहाली की दिशा में अहम कदम बताया जा रहा है।

पुनर्वास नीति के तहत मिलेगा लाभ
पुलिस प्रशासन का कहना है कि मुख्यधारा में लौटने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास योजना के तहत आर्थिक सहायता और पुनर्वास का लाभ दिया जाएगा। इसके तहत उन्हें समाज में दोबारा स्थापित करने और सामान्य जीवन जीने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और भी उग्रवादी हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण कर सकते हैं।