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गढ़वा में बाघ और हाथियों का आतंक, 4 दिनों में 2 लोगों की मौत; आधा दर्जन पशुओं का शिकार

गढ़वा में बाघ और हाथियों का आतंक, 4 दिनों में 2 लोगों की मौत; आधा दर्जन पशुओं का शिकार

गढ़वा:
झारखंड के गढ़वा जिले में जंगली हाथियों के बाद अब बाघ की मौजूदगी ने भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। रंका, भंडरिया, चिनिया, बड़गढ़ और रमकंडा के जंगलों में बाघ और जंगली हाथियों की गतिविधियों से लोगों में दहशत का माहौल है। पिछले चार दिनों में जहां बाघ आधा दर्जन से अधिक पशुओं को अपना निवाला बना चुका है, वहीं जंगली हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है। वन विभाग ने बाघ की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। 

ढेगुरा जंगल में बाघ ने तीन बकरियों और बछड़े को बनाया शिकार
रंका के ढेगुरा जंगल में बाघ ने तीन बकरियों और एक बछड़े को मार डाला। इससे पहले भंडरिया क्षेत्र में भी बाघ द्वारा पशुओं के शिकार किए जाने की सूचना सामने आई थी। लगातार पशुओं के शिकार की घटनाओं के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है और लोग जंगल की ओर जाने से बच रहे हैं।

पगमार्क मिलने के बाद वन विभाग हुआ अलर्ट
जंगल में बाघ के पगमार्क मिलने के बाद वन विभाग की टीम अलर्ट हो गई है। ग्रामीणों का दावा है कि जंगल में मिले पदचिह्न सामान्य जंगली जानवरों के निशान से अलग हैं। इसके बाद क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी को लेकर आशंका और बढ़ गई। वन विभाग की टीम लगातार इलाके में सर्च अभियान चलाकर बाघ की गतिविधियों पर नजर रख रही है। जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) एबीन बेनी अब्राहम ने बताया कि भंडरिया और बड़गढ़ क्षेत्र से भी बाघ की मौजूदगी की सूचना मिली है। ग्रामीणों से मिली जानकारी और मौके पर मिले पगमार्क के आधार पर वन विभाग ने बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की है। विभाग की टीम लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रही है।

सुबह-शाम जंगल नहीं जाने की अपील
वन विभाग ने ग्रामीणों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग का कहना है कि लोग सुबह और शाम के समय जंगल की ओर न जाएं और अनावश्यक रूप से वन क्षेत्र में प्रवेश करने से बचें। ग्रामीणों को वन्यजीवों की गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तुरंत वन विभाग को सूचना देने की सलाह भी दी गई है।

जंगली हाथियों के हमले में चार दिनों में दो लोगों की मौत
एक तरफ बाघ की दस्तक ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ाई है, तो दूसरी तरफ जंगली हाथियों के झुंड ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। पिछले चार दिनों में रंका और चिनिया इलाके में जंगली हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है। दोनों लोगों को हाथियों ने पैरों तले कुचल दिया। घटनाओं के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति आक्रोश भी देखने को मिला। लोगों ने सड़क जाम कर विरोध जताया और वन्यजीवों के हमले से सुरक्षा की मांग की। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर कब तक उन्हें जंगली जानवरों के हमले का खतरा झेलना पड़ेगा।

पीड़ित परिवारों को नियमानुसार मिलेगा मुआवजा
डीएफओ एबीन बेनी अब्राहम ने बताया कि हाथियों के हमले में हुई दोनों मौतों की जानकारी वन विभाग को मिली है। दोनों मामलों में पीड़ित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा दिया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि शाम के बाद और अहले सुबह जंगल की ओर न जाएं और जंगली हाथियों की मौजूदगी वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतें।

इंसान और वन्यजीवों के बीच संघर्ष कम करने पर जोर
वन विभाग का कहना है कि जंगल का अपना प्राकृतिक स्वरूप और पारिस्थितिकी तंत्र होता है। जहां जंगल होगा, वहां वन्यजीवों की मौजूदगी भी रहेगी। बाघ राष्ट्रीय पशु है, जबकि हाथी भी जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ऐसे में वन विभाग का जोर ग्रामीणों को जागरूक करने और इंसान तथा वन्यजीवों के बीच संघर्ष को कम करने पर है। विभाग ने लोगों से सतर्क रहने, जंगल में अनावश्यक रूप से नहीं जाने और वन्यजीवों की गतिविधियों की सूचना तत्काल विभाग को देने की अपील की है। फिलहाल वन विभाग की टीम गढ़वा के प्रभावित जंगल क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही है।
 

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