गढ़वा
गढ़वा जिला में गोवंशी पशु तस्करी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. आरोप है कि यह जिला पशु तस्करों के लिए एक सेफ जोन बनता जा रहा है, जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में गोवंशी पशुओं की तस्करी की जा रही है. बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के कोण क्षेत्र के रास्ते तस्कर गढ़वा जिले में प्रवेश करते हैं और सोन तटीय क्षेत्रों खरौंधी, केतार, कांडी, माझिआंव होते हुए पलामू जिला के उंटारी रोड, मोहम्मदगंज, हैदरनगर और जपला के रास्ते बिहार बॉर्डर तक पहुंचते हैं. इसके बाद इन पशुओं की बिहार और पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में अवैध तरीके से बिक्री की जाती है.
स्थानीय लोग पकड़ रहे पशु तस्कर लेकिन तस्करी का सिलसिला जारी
हाल के दिनों में माझिआंव, कांडी और खरौंधी थाना क्षेत्रों में पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से कई मामलों में कार्रवाई करते हुए पशु तस्करों को पकड़ा गया है. इसके बावजूद तस्करी का यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. कांडी थाना क्षेत्र अंतर्गत मझिआंव-सुंडीपुर मुख्य पथ पर जयनगरा गांव में ग्रामीणों ने एक पिकअप वाहन को रोककर उसमें भरे 17 मवेशियों को बरामद किया. बताया जाता है कि मवेशियों को अत्यंत क्रूरता के साथ वाहन में लादा गया था. घटना की सूचना मिलने पर थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. इसके बाद ग्रामीणों की मदद से सभी मवेशियों को वाहन से नीचे उतारा गया और सुरक्षित किया गया.

खलासी ने बताया तस्करी का पूरा रूट
इस मामले में उपचालक लाल मोहम्मद अंसारी ने बताया कि सभी मवेशियों को नगर के पास से फिरोज खान द्वारा लोड किया गया था और इन्हें भवनाथपुर, हरिहरपुर और कांडी थाना क्षेत्र होते हुए बिहार के रोहतास जिला के बारुण ले जाया जा रहा था. उन्होंने यह भी बताया कि वह केवल पिकअप वाहन पर खलासी के रूप में कार्यरत हैं.
अवैध तस्करी रोक लगाने की मांग
वहीं खरौंधी पंचायत के उप मुखिया रवि रंजन मेहता ने बताया कि मवेशियों को बेहद क्रूरता पूर्वक पिकअप वाहन में ठूंसा गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि वाहन ने रास्ते में एक खड़ी ट्रैक्टर को भी टक्कर मार दी, जिसके बाद ग्रामीणों ने आक्रोशित होकर वाहन को घेर लिया और मवेशियों को मुक्त कराया. सभी मवेशियों को ग्रामीणों के बीच सुरक्षित रूप से वितरण किया गया. इसी तरह खरौंधी थाना क्षेत्र में भी प्रतिदिन गोवंशी पशुओं की तस्करी का मामला सामने आ रहा है. स्थानीय प्रखंड प्रमुख आभा रानी ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि लगातार हो रही तस्करी का वे विरोध कर रही हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने जिला प्रशासन से इस अवैध तस्करी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है.