द फॉलोअप रांची
राजधानी दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मियां अचानक तेज हो गई हैं। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के आवास पर 'डिनर डिप्लोमेसी' के जरिए चुनावी रणनीति और संगठन को धार दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ मोदी कैबिनेट के बड़े विस्तार और फेरबदल की सुगबुगाहट ने नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। संगठन में बदलाव के बाद अब सबकी नजरें केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित मेकओवर पर टिकी हैं, जहां कई दिग्गजों की कुर्सी पर गाज गिर सकती है तो कई नए चेहरों की लॉटरी लग सकती है।

संजय सेठ की लॉबिंग, चंद्रप्रकाश भी लगा रहे जोर
दिल्ली के इस राजनीतिक घटनाक्रम का सीधा असर झारखंड के सियासी गलियारों में भी देखने को मिल रहा है। खबर है कि नितिन नवीन के इस हाई-प्रोफाइल रात्रि भोज में झारखंड बीजेपी के दो पूर्व विधायक और एक वर्तमान विधायक भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पहुंचे। कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट के बीच झारखंड से आने वाले केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ ने मंत्रिमंडल में अपना पद बचाए रखने के लिए दिल्ली में लॉबिंग तेज कर दी है। वहीं दूसरी ओर, एनडीए की सहयोगी आजसू पार्टी (AJSU) के सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी भी आधे-अधूरी इच्छा और हिचकिचाहट के साथ ही सही, लेकिन मंत्री पद पाने के लिए पार्टी आलाकमान की 'गणेश परिक्रमा' करने में जुट गए हैं।
अध्यक्ष के आवास पर मुख्यमंत्री और मंत्रियों का जमघट
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन ने पहली बार अपने आवास पर इतने बड़े पैमाने पर रात्रि भोज की मेजबानी की। दिल्ली में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के सम्मेलन में शामिल होने आए राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को एक मंच पर लाकर पार्टी नेतृत्व ने 'एक तीर से कई निशाने' साधे हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी, यूपी के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, उत्तराखंड के सतपाल महाराज और दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा समेत कई वरिष्ठ नेता इस डिनर में पहुंचे। यह केवल एक अनौपचारिक भोज नहीं था, बल्कि इसके जरिए 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए धरातल पर रणनीति तैयार करने, एनडीए (NDA) के सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और जल जीवन मिशन जैसी जनहित योजनाओं को तेजी से लागू करने पर गहन मंथन हो सकता है।
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कैबिनेट में बड़े बदलाव के संकेत: गडकरी का विभाग बदलेगा, वैष्णव को प्रमोशन!
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, मोदी कैबिनेट में 16 से 17 नए चेहरों की एंट्री हो सकती है। फिलहाल मंत्रिमंडल में 69 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के तहत यह संख्या 81 तक हो सकती है। यानी 12 पद पूरी तरह खाली हैं। इसके अलावा 14 मंत्री ऐसे हैं जो एक से अधिक मंत्रालयों का प्रभार संभाल रहे हैं, जैसे धर्मेंद्र प्रधान के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। रेलवे, आईटी और सूचना प्रसारण जैसे बड़े विभाग संभाल रहे अश्विनी वैष्णव के काम से आलाकमान संतुष्ट नजर आ रहा है। चर्चा है कि उनके कुछ विभाग कम करके उन्हें प्रमोशन देते हुए 'टॉप फाइव' मंत्रियों की सूची में शामिल किया जा सकता है। वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी को लेकर अटकलें तेज हैं कि उनके पास से भारी-भरकम मंत्रालय वापस लेकर कोई अन्य जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है या उनके पोर्टफोलियो में बड़ा फेरबदल हो सकता है।
