द फॉलोअप, रांची
झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर उल्टी गिनती शुरू हो गयी है। 18 जून की सुबह 9 बजे मतदान प्रारंभ हो जाएगा। शाम चार बजे समाप्त होगा। फिर शाम पांच बजे से मतगणना प्रारंभ होगी। शाम 6.30 बजे तक पहला परिणाम आ जाने की संभावना है। इधर राज्यसभा चुनाव को लेकर दलों ने दलीय एजेंटों की नियुक्ति कर अपना संदेश दे दिया है। जिस तरह कांग्रेस ने प्रदेश प्रभारी के राजू और सांसद सिरिबेला प्रसाद को पार्टी एजेंट बनाया है, इसे देखते हुए पार्टी के विधायकों के लिए क्रास वोटिंग करना खतरे से खाली नहीं होगा। अब क्रास वोटिंग का सीधा अर्थ है कि संबंधित विधायक को कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा। राजद ने भी लालू प्रसाद के विश्वस्त और पार्टी के वरिष्ठ नेता भोला यादव को पार्टी का एजेंट बनाया है। भोला बाबू की निष्ठा को जानने और समझने वाले आकलन कर चुके हैं कि अब कोई भी विधायक पार्टी हाईकमान की इच्छा के बगैर अंतर आत्मा की आवाज पर क्रास वोटिंग नहीं कर सकेंगे। यहां मालूम हो कि भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी की जीत और हार पूरी तरह क्रास वोटिंग पर ही टिकी है। क्रास वोटिंग स्टॉप, परिमल नाथवानी आउट।

झामुमो अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने भी अपने विश्वसनीय विनोद कुमार पांडेय और सुदिव्य कुमार सोनू को पार्टी एजेंट बनाया है। दोनों ही पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। विनोद कुमार पांडेय की संगठन पर पकड़ है तो सुदिव्य सोनू का मंत्रिमंडल में मजबूती। इससे अधिक दोनों नेता हेमंत के काफी करीब हैं। भाजपा ने भी अमर कुमार बाउरी और विधायक नवीन जायसवाल को पार्टी एजेंट बनाया है। नामांकन और नामांकन पत्र को लेकर उठे विवाद के समय नवीन जायसवाल परिमल नाथवानी के काफी करीब दिखे। नामांकन करने से पहले परिमल नाथवानी और एनडीए के विधायक नवीन जायसवाल के ही आवास पर ब्रेक फास्ट किया था। उसी तरह जब परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र पर रिटर्निंग अफसर के यहां विवाद चल रहा था, नाथवानी के बी हाफ में पूरे दिन नवीन जायसवाल विधानसभा में डटे रहे। इससे जायसवाल पर नाथवानी को पूरे भरोसे की उम्मीद दिखती है।
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लेकिन पूरे परिदृश्य में किसी पार्टी के कर्णधार ही कातिल बन जाएं तो, इससे इंकार नहीं किया जा रहा। क्योंकि पार्टी के एजेंटों की नियुक्ति कर्णधारों के द्वारा की गयी है। पार्टी के एजेंट मतदान के समय या बाद में अपने आलाकमान को ही सच बताने के लिए जिम्मेदार हैं। अगर आलाकमान के निर्देश और आदेश पर कुछ विधायक क्रास वोटिंग करते हैं और पार्टी के एजेंट इसे सार्वजनिक नहीं करते तो चुनाव में खेला हो सकता है। कुछ दलों में इसकी आशंका भी व्यक्त की जा रही है। क्योंकि क्रास वोटिंग के बाद बैलेट बॉक्स में किसी विधायक का मत पत्र डलते ही, पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि किसने क्रास वोटिंग किया। इस स्थिति में क्रास वोटिंग कोई और करे और दोष किसी और मढा जाए, इस संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है। और इस तरह के खेल को रोकने की एक ही मारक रणनीति थी, कांग्रेस का पार्टी एजेंट झामुमो का और झामुमो का पार्टी एजेंट कांग्रेस का बनता। इसी तरह भाजपा का एजेंट जदयू का और जदयू का लोजपा का बनाया जाता। लेकिन इंडिया गठबंधन में ऐसा नहीं किया गया। भाजपा को भी अपनी ही पार्टी के नेताओं पर भरोसा दिखा।
