द फॉलोअप गढ़वाः
गढ़वा सदर प्रखंड का भदुमा गांव चारों ओर पहाड़ों से घिरा हुआ है। गांव की खूबसूरती को अन्नराज डैम और भी खास बनाता है। इसी डैम में मत्स्य विभाग ने आदिम जनजाति के लोगों की आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से केज लगाए हैं। विभाग की इस पहल से स्थानीय आदिम जनजाति के मत्स्य पालकों को मछली पालन के जरिए रोजगार और आमदनी का नया जरिया मिला है। मत्स्य पालकों के मुताबिक, विभाग की ओर से अन्नराज डैम में कुल 10 केज उपलब्ध कराए गए हैं। एक केज में करीब 20 हजार मछलियां पालने की क्षमता है। इस हिसाब से सभी 10 केज में करीब दो लाख मछलियों का पालन किया जा रहा है। पिछले वर्ष मत्स्य पालकों को इससे अच्छी आमदनी हुई थी, लेकिन इस वर्ष भीषण गर्मी के बीच बड़ी संख्या में मछलियों की मौत होने से उन्हें आर्थिक नुकसान होने का दावा किया जा रहा है।

मत्स्य पालकों का दावा 70 हजार मछलियां मरीं
मत्स्य पालकों का दावा है कि इस वर्ष भीषण गर्मी के कारण करीब 70 हजार मछलियां मर गईं। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में मछलियों की मौत से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मत्स्य पालकों के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष स्थिति खराब रही है और मछलियों की मौत का सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ा है। वहीं, 70 हजार मछलियों के मरने के दावे पर जिला मत्स्य पदाधिकारी ने असहमति जताई है। विभाग का कहना है कि मछलियों के बीज बंगाल से लाए जाते हैं और लंबी दूरी की यात्रा के दौरान कुछ मछलियों के मरने की संभावना रहती है। विभाग के मुताबिक, करीब दो लाख मछलियों के बीज में 10 से 20 हजार तक मछलियों की मौत की संभावना सामान्य रूप से मानी जा सकती है, लेकिन 70 हजार मछलियों के मरने की जानकारी विभाग के संज्ञान में नहीं है।

पूरे मामले की हो रही निगरानी
जिला मत्स्य पदाधिकारी ने कहा कि मामले की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। विभाग की ओर से अन्नराज डैम में लगाए गए केज और मछलियों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। विभाग की इस पहल का उद्देश्य आदिम जनजाति के मत्स्य पालकों को रोजगार और स्थायी आय का साधन उपलब्ध कराना है, लेकिन इस वर्ष मछलियों की मौत को लेकर मत्स्य पालकों के दावे और विभाग के आंकड़ों में अंतर सामने आया है।