द फॉलोअप डेस्क
पश्चिमी सिंहभूम जिले में जंगली दंतैल हाथियों का आतंक अब भयावह और बेकाबू हो चुका है। एक ही रात में अलग-अलग इलाकों में हाथियों ने सात लोगों की जान ले ली, जबकि एक रात पहले ही गोइलकेरा प्रखंड में एक परिवार के तीन सदस्य हाथी के हमले में मारे गये थे। लगातार हो रही इन घटनाओं ने पूरे कोल्हान क्षेत्र को दहशत में डाल दिया है।.jpeg)
बाबरिया गांव में उजड़ा पूरा परिवार
6 जनवरी की देर रात नोवामुंडी प्रखंड के जेटेया थाना क्षेत्र में दंतैल हाथी ने गांवों में घुसकर तांडव मचाया। सबसे दर्दनाक घटना बाबरिया गांव में हुई, जहां एक ही परिवार के पांच सदस्य (पति, पत्नी और उनके तीन मासूम बच्चे) हाथी के हमले में कुचलकर मारे गये। इस भीषण हमले में परिवार का एक बच्चा किसी तरह जान बचाने में सफल रहा।.jpg)
सोते हुए परिवार पर अचानक हमला
ग्रामीणों के अनुसार, मंगलवार रात करीब 10 बजे पीड़ित परिवार अपने घर में सो रहा था। तभी हाथी ने अचानक घर पर हमला कर दिया। दीवारें तोड़कर हाथी भीतर घुस गया और सोते हुए लोगों पर टूट पड़ा। कुछ ही मिनटों में पूरा परिवार खत्म हो गया। घर पूरी तरह तबाह हो गया और गांव में चीख-पुकार मच गई। हाथी का कहर बाबरिया तक सीमित नहीं रहा। पास के बड़ा पासीया गांव में एक ग्रामीण को हाथी ने रौंद डाला, जबकि लांपाईसाई गांव में भी एक अन्य व्यक्ति हाथी के हमले का शिकार हो गया।
एक रात पहले गोइलकेरा में भी तीन की गई थी जान
गौरतलब है कि इससे एक रात पहले, सोमवार देर रात गोइलकेरा प्रखंड के आराहासा पंचायत अंतर्गत सोवां गांव में भी जंगली हाथी ने एक ही परिवार के तीन लोगों की जान ले ली थी। मृतकों में कुंदरा बाहदा, उसका छह वर्षीय बेटा कोदमा बाहदां और आठ माह की बेटी सामू बाहदां शामिल थे। इस हमले में परिवार की एक बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी, जिसे राउरकेला रेफर किया गया।
लगातार बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा, वन विभाग पर सवाल
बीते कुछ दिनों में पश्चिमी सिंहभूम जिले में हाथियों के हमले में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। गांव-गांव में दहशत का माहौल है, लोग रात में घरों में सोने से भी डर रहे हैं। इसके बावजूद वन विभाग की कार्रवाई चेतावनी, माइक अनाउंसमेंट और तात्कालिक मुआवजे तक सीमित नजर आ रही है।