द फॉलोअप डेस्क
आज अहले सुबह हजारीबाग जिले के कटकमदाग थाना क्षेत्र अंतर्गत नवादा पंचायत के बनहा गांव में हाथी के हमले से एक ग्रामीण की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान गणेश गोप के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि गणेश गोप सुबह शौच के लिए घर से बाहर निकले थे, तभी अचानक हाथी ने उन पर हमला कर दिया और कुचलकर उनकी जान ले ली।
यह घटना कोई अकेली नहीं है। लगातार दूसरे दिन हाथी के हमले से जान जाने का मामला सामने आया है। इससे पहले बीती देर रात हजारीबाग के चुटयारों इलाके में एक दंपति पर हाथी ने हमला कर दिया था। इस हमले में पति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पत्नी गंभीर रूप से घायल हैं। घायल महिला का इलाज शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है, जहां उनकी स्थिति अब भी चिंताजनक बताई जा रही है।
लगातार हो रही इन घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के रेंजर, स्थानीय मुखिया, जनप्रतिनिधि और सदर विधायक प्रदीप प्रसाद मौके पर पहुंचे। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मृतक के परिजनों को ढांढस बंधाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति गहरा आक्रोश देखने को मिला।.jpeg)
मौके पर मौजूद सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस इलाके में हाथियों की नियमित आवाजाही रहती है, वहां न तो माइकिंग की व्यवस्था की जा रही है और न ही समय रहते लोगों को सतर्क किया जा रहा है। वन विभाग न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था में विफल है, बल्कि लोगों को जागरूक करने में भी पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।.jpg)
विधायक ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होती है, तो वे संबंधित अधिकारियों के टेबल पर जाकर शव रखने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना था कि आम ग्रामीणों की जान की कीमत पर लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं, वन विभाग के रेंजर घटनास्थल पर पहुंचकर किसी तरह लोगों को शांत कराने और समझाने में जुटे नजर आए। हालांकि, मीडिया के सवालों से वे बचते हुए दिखाई दिए। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक हाथियों की निगरानी, माइकिंग और ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जाएगी, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं।
लगातार हो रही मौतों ने प्रशासन और वन विभाग की तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि इन घटनाओं के बाद जिम्मेदार विभाग क्या ठोस कदम उठाते हैं, या फिर ग्रामीण यूं ही अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर रहेंगे।