जमशेदपुर
झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त कमियों और उनके समाधान की दिशा तलाशने के लिए 6 सितंबर को जमशेदपुर में फैक्ट फाइंडिंग सेमिनार आयोजित होगा। खास बात यह होगी कि सेमिनार में तीन विश्वविद्यालयों के कुलपति एक मंच पर मौजूद रहेंगे, वहीं हाल ही में दिल्ली और रांची में आंदोलन करने वाले छात्रों को भी आमंत्रित किया गया है। छात्र अपने असंतोष के कारण और आंदोलन के लिए उन्हें मजबूर करने वाली परिस्थितियों को सामने रखेंगे। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने शुक्रवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सेमिनार का उद्देश्य केवल शिक्षा क्षेत्र की कमियों पर चर्चा करना नहीं, बल्कि समस्याओं की वास्तविक वजहों को समझना और उनके समाधान के लिए सरकार से आवश्यक कदम उठाने का आग्रह करना है। इसका आयोजन स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट और नेचर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
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छात्रों के भीतर असंतोष
सरयू राय ने बताया कि सेमिनार में रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा, विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्रभूषण शर्मा और झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह शामिल होंगे। सेमिनार में पहली बार एक मंच पर तीन कुलपतियों की मौजूदगी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सेमिनार में हाल में रांची में आंदोलन करने वाले कुछ छात्रों को भी बुलाया गया है। उनसे यह जानने की कोशिश होगी कि आखिर किन परिस्थितियों में छात्रों के भीतर असंतोष पैदा हुआ और उन्हें आंदोलन के रास्ते पर क्यों जाना पड़ा। व्यवस्था में ऐसी कौन-सी कमियां हैं, जो छात्र असंतोष का कारण बन रही हैं, इस पर छात्रों से सीधे जानकारी ली जायेगी। सरयू राय ने शिक्षकों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शिक्षक योग्य हैं और अपने विषय की अच्छी जानकारी रखते हैं, लेकिन सरकारी कार्यों में लगातार प्रतिनियुक्ति के कारण विद्यार्थियों से उनका तारतम्य कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक कभी जिलाधिकारी कार्यालय, कभी जेएनएसी और कभी दूसरे सरकारी कार्यों में लगाये जाते हैं। वर्तमान में भी शिक्षक पिछले तीन महीने से एसआईआर के कार्य में लगे हैं। इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ रहा है।

तीन सत्रों में प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक चर्चा
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने की इस कार्यशैली में बदलाव जरूरी है। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक और विद्यार्थी के बीच नियमित संवाद और बेहतर तालमेल जरूरी है। सेमिनार की शुरुआत सुबह 9 से 10 बजे तक पंजीकरण से होगी। उद्घाटन सत्र सुबह 10 से 11 बजे तक चलेगा। पहला सत्र सुबह 11.15 से दोपहर 12.30 बजे तक प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा पर केंद्रित होगा। दूसरा सत्र दोपहर 12.30 से 2 बजे तक उच्च शिक्षा और छात्र-युवा असंतोष पर होगा। भोजनावकाश के बाद तीसरे सत्र में शिक्षकों का सम्मान किया जायेगा। सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र भी दिया जायेगा। सरयू राय ने बताया कि सेमिनार में सभी विद्यालयों को आमंत्रित किया गया है। इस सेमिनार का सबसे बड़ा आकर्षण तीन विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का एक साथ मंच साझा करना होगा। आयोजकों के अनुसार, जमशेदपुर में अब तक एक ही मंच पर तीन कुलपतियों की मौजूदगी का ऐसा आयोजन देखने को नहीं मिला है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों पर कुलपतियों, शिक्षकों और छात्रों के एक साथ विचार रखने से सेमिनार की चर्चा और महत्वपूर्ण हो सकती है।