द फॉलोअप डेस्क
सरायकेला–खरसावां जिला प्रशासन की पहल पर बुधवार को ‘Aqualine Bhuvanam’ पानी की खेती परियोजना का शुभारंभ किया गया। इस नवाचारी पायलट परियोजना का उद्देश्य वर्षा जल संचयन, भूगर्भ जल के पुनर्भरण और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है, ताकि क्षेत्र में भूजल स्तर में सुधार हो सके और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, सरायकेला की छात्राओं को स्वच्छ और पर्याप्त जल उपलब्ध कराया जा सके। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपायुक्त नितिश कुमार सिंह मौजूद रहे। उनके आगमन पर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं ने बैंड के साथ उनका स्वागत किया और उन्हें परियोजना स्थल तक ले जाया गया। इसके बाद उपायुक्त ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ परियोजना का औपचारिक उद्घाटन किया।

इस अवसर पर आरटीएन रथिन भद्र, आरटीएन राजा बागची (संस्थापक, Aqualine Bhuvanam), जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी और इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोज कुमार सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे। उद्घाटन के बाद विद्यालय परिसर में एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें परियोजना के उद्देश्य और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। इस दौरान रथिन भद्र ने प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि इस परियोजना के तहत वर्षा जल को वैज्ञानिक तरीके से संग्रहित कर उसे भूगर्भ में पुनर्भरित किया जाएगा। इससे क्षेत्र में जल स्तर में सुधार होगा और मिट्टी में नमी बनी रहेगी, जिससे पौधों और हरित क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा।

अपने संबोधन में उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने कहा कि यह पहल केवल विद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहेगी। इस तकनीक के माध्यम से जिले के आदिवासी समुदाय और किसानों को भी वर्षभर खेती के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उपायुक्त ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे केवल नौकरी करने का नहीं, बल्कि भविष्य में नौकरी देने का लक्ष्य रखें। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ आसपास की समस्याओं और संसाधनों को समझकर नवाचार की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। सरकार स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में युवाओं को कई अवसर दे रही है, इसलिए छात्राओं को नई सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। जिला प्रशासन का मानना है कि ‘Aqualine Bhuvanam- पानी की खेती’ एक प्रभावी, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ पहल है। इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए भविष्य में इस तकनीक को जिले के अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके और जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सके।