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बेटी के लिए पिता का अनोखा संकल्प, हाथगाड़ी खींचते हुए पहुंचा बाबा बैद्यनाथ के दरबार 

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द फॉलोअप डेस्क   

बेटियों को लेकर समाज में आज भी तरह-तरह की सोच देखने को मिलती है। कहीं बेटी के जन्म पर परिवार में खुशियां मनाई जाती हैं, तो कहीं उसे बोझ समझने जैसी पुरानी और गलत मानसिकता अब भी दिखाई देती है। ऐसे समय में बिहार के सुल्तानगंज से देवघर तक एक पिता की अनोखी यात्रा लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। दरअसल एक पिता ने भगवान शिव से मन्नत मांगी थी कि अगर उनके घर बेटी का जन्म हुआ, तो वह अपनी बच्ची को बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर लेकर जाएंगे। जब उनके घर बेटी ने जन्म लिया, तो उन्होंने भगवान शिव  से किया अपना वादा याद रखा और उसे पूरा करने के लिए यात्रा पर निकल पड़े। खास बात यह है कि पिता अपनी नन्ही बेटी को हाथगाड़ी में लिटाकर खुद उसे खींचते हुए सुल्तानगंज से देवघर की ओर बढ़ रहे हैं। परिवार के कुछ सदस्य भी उनकी इस यात्रा में साथ नजर आ रहे हैं। रास्ता आसान नहीं है, लेकिन पिता के चेहरे पर थकान से ज्यादा अपनी मन्नत पूरी करने की खुशी और विश्वास दिखा।

भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथा ने समाज को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाया

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो और तस्वीरों को देखकर लोग एक पिता की श्रद्धा के साथ-साथ बेटी के प्रति उनके प्रेम की भी जमकर तारीफ कर रहे हैं। इस वायरल वीडियो को देखने के बाद लोगों का कहना है कि भगवान से किया हुआ वादा निभाने के लिए इतनी कठिन यात्रा करना उनकी आस्था को दर्शाता है। वहीं, कई लोग इसे बेटी के जन्म को भगवान के आशीर्वाद के रूप में स्वीकार करने की खूबसूरत मिसाल भी बता रहे हैं। सुल्तानगंज से देवघर तक की यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं रह गई है। यह उस सोच के खिलाफ भी एक संदेश बनकर सामने आई है, जिसमें बेटियों को बोझ माना जाता है। कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथा ने समाज को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में एक पिता का अपनी बेटी के जन्म पर मन्नत पूरी करने के लिए इतना बड़ा संकल्प लेना निश्चित रूप से लोगों को सोचने पर मजबूर करता है। यात्रा के दौरान जैसे-जैसे यह परिवार बाबा बैद्यनाथ धाम के करीब पहुंचा, श्रद्धालुओं और सेवा में जुटे लोगों ने भी उनका स्वागत किया।

बेटियों को लेकर गलत सोच को बदलने का संदेश

सड़क के किनारे मौजूद सेवा करने वाले लोगों ने फूल बरसाकर पिता और उनकी बेटी का स्वागत किया। इस स्वागत ने इस यात्रा को और भी खास बना दिया। बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक पहुंचने की खुशी पिता के चेहरे पर साफ नजर आई। एक तरफ भगवान शिव के प्रति आस्था, दूसरी तरफ अपनी नन्ही बेटी के लिए प्यार और तीसरी तरफ वर्षों से चली आ रही बेटियों को लेकर गलत सोच को बदलने का संदेश, इस यात्रा में ये तीनों भाव एक साथ दिखाई दिए। यह कहानी हमें एक सीधी और जरूरी बात याद दिलाती है कि बेटी किसी परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि परिवार की खुशी और आशीर्वाद होती है। जिस बच्ची के जन्म पर उसके पिता ने भगवान से किया वादा निभाने के लिए खुद रास्ते की मुश्किलें उठाईं, वही बच्ची इस यात्रा की सबसे बड़ी वजह भी बनी और सबसे खूबसूरत पहचान भी। सुल्तानगंज से देवघर तक पिता का यह सफर अब लोगों के लिए श्रद्धा, संकल्प और बेटी के प्रति प्रेम की मिसाल बन गया है। सच ही है, जब किसी सफर के पीछे आस्था और अपने बच्चे के लिए बेपनाह प्यार हो, तो रास्ते की मुश्किलें भी छोटी पड़ जाती हैं।

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