द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
यह दृश्य किसी आईएएस, आईपीएस या कॉलेज की बड़ी डिग्री की परीक्षा का नहीं है, बल्कि निरक्षरता के अंधेरे से निकलकर साक्षरता के उजाले की ओर बढ़ने की एक अनोखी कोशिश है। जिन हाथों ने अब तक खेतों में कुदाल और हल चलाया था, या जो हाथ घर के किचन में चूल्हा-चौका तक सीमित थे, वे कांपते हाथ जब प्रश्नपत्र पर उत्तर लिख रहे थे, तो मानों जामताड़ा की बदलती तस्वीर खुद ब खुद बयां हो रही थी। केंद्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त तत्वावधान में 20 सितंबर (रविवार) को पूरे झारखंड में ‘उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत 'बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता जांच परीक्षा' का आयोजन किया गया। इसी क्रम में जामताड़ा जिले के सभी उत्क्रमित एवं उच्च विद्यालयों में परीक्षा आयोजित की गई। सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक चले इस आयोजन में चयनित परीक्षार्थियों को 3 घंटे की समयावधि दी गई। विद्यालयों के प्रधान शिक्षकों को ही परीक्षा केंद्रों का केंद्राधीक्षक बनाया गया था।
45 से 50 वर्ष तक के पुरुष और महिले भी हुए शामिल
परीक्षा को निष्पक्ष और सुचारू ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला स्तर पर एक विशेष कंट्रोल रूम की भी स्थापना की गई, जहां से पल-पल की निगरानी की जा रही थी। जिले के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, कटंकी में आयोजित परीक्षा में आसपास के विद्यालय क्षेत्रों के दर्जनों असाक्षर पुरुषों और महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। 'फॉलोअप' की टीम ने जब जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों का दौरा किया, तो देखा कि 45 से 50 वर्ष तक की उम्र के बुजुर्ग, महिलाएं और पुरुष बढ़-चढ़कर इस परीक्षा में शामिल हो रहे थे। परीक्षा देकर बाहर निकलीं महिलाओं और बुजुर्गों ने बताया कि यह पहल उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी। परीक्षार्थियों का कहना था कि थोड़ा-बहुत पढ़-लिख लेने से वे न केवल अपने बच्चों की पढ़ाई में मदद कर सकेंगे, बल्कि बाजार के लेन-देन, घर के हिसाब-किताब और बैंक के कामों में भी आत्मनिर्भर बनेंगे। अब उन्हें किसी फॉर्म पर अंगूठा लगाने के बजाय अपने हस्ताक्षर करने में गर्व महसूस होगा। इस परीक्षा में सफल होने वाले नव-साक्षर व्यक्तियों को सरकार की ओर से आधिकारिक साक्षरता प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा, जो उनके साक्षर होने का सरकारी प्रमाण होगा। इस संपूर्ण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य और देश से निरक्षरता का पूरी तरह से उन्मूलन कर हर नागरिक को बुनियादी शिक्षा और गणितीय ज्ञान से जोड़ना है। जामताड़ा के परीक्षा केंद्रों में दिखा यह उत्साह साबित करता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।