रांची
जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत झारखंड सरकार और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के बीच नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर ऑनलाइन जुड़े मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में रुकी हुई योजनाओं को गति देने के लिए केंद्र से करीब 6,500 करोड़ रुपये की लंबित सहायता राशि जल्द जारी करने की मांग की। बैठक में योजनाओं की सख्त निगरानी के लिए जिलाधिकारियों को सक्रिय होने और 100 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की उच्चतम स्तर पर समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा, बैठक में 1,400 करोड़ रुपये की अनुचित लागत वाले एक 'ओवरसाइज्ड घटक' पर गंभीर रुख अपनाते हुए उसकी विस्तृत समीक्षा करने के निर्देश जारी किए गए हैं। 
ग्रामीण स्तर पर 'जल सहिया' की तैनाती और बजट
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य सरकार ने प्रत्येक गांव में जल सहिया की तैनाती की है। ग्रामीण स्तर पर पानी और स्वच्छता के प्रबंधन को मजबूती देने के लिए इन जल सहियाओं को ₹2,500 प्रति माह की सहायता राशि दी जा रही है। इसके साथ ही, उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 से अब तक राज्य में ₹24,635 करोड़ की मल्टी विलेज स्कीम और सिंगल विलेज स्कीम पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा सके।
एमओयू समारोह और प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति
अब सभी जिलाधिकारियों को जेजेएम परियोजनाओं की सक्रिय निगरानी और धरातल पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही, झारखंड जल जीवन मिशन के 'प्रबंध निदेशक' पद की जिम्मेदारी किसी संयुक्त सचिव रैंक के वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने की सिफारिश की गई है। इससे पहले, आयोजित एमओयू (MoU) समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने की। इस महत्वपूर्ण अवसर पर झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद, केंद्रीय राज्य मंत्री वी. सोमन्ना, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के सचिव और राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के एमडी सहित केंद्र व राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।