जामताड़ा
द फॉलोअप में बीते कल छपी खबर का असर अब प्रशासनिक स्तर पर दिखने लगा है. निर्माणाधीन डायवर्सन पुल के एप्रोच रोड में दरार और गुणवत्ता पर उठे सवाल वाली खबर को लेकर डीसी आलोक कुमार ने पथ निर्माण विभाग (आरसीडी) को डायवर्सन पुल को जोड़ने वाली टूटी-फूटी एप्रोच सड़क की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. वहीं, खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग हरकत में आया और मजदूर लगाकर टूटे पीसीसी सड़क के हिस्से को तोड़कर हटाया गया. हालांकि इसके साथ ही एप्रोच सड़क के टूटे हिस्से पर जीएसबी डालकर गुणवत्ता संबंधी खामियों को छिपाने की कोशिश किए जाने की चर्चा भी तेज हो गई है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क की वास्तविक स्थिति सुधारने के बजाय लीपापोती की जा रही है.
ग्रामीणों के दबाव में PCC सड़क का हुआ था निर्माण: विभागीय अधिकारी
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों के दबाव में वहां पीसीसी सड़क बनाई गई थी, जबकि मूल प्राक्कलन में ब्लैकटॉप सड़क का प्रावधान था. लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि निर्माण कार्य मानक के अनुरूप हुआ था, तो सड़क निर्माण के तुरंत बाद दरार और टूट-फूट कैसे सामने आ गई. इधर, एप्रोच रोड पर ग्रेनुलर सब बेस (जीएसबी) बिछाकर गुणवत्ता संबंधी सवालों को दबाने की कोशिश किए जाने की चर्चा भी तेज है. गिट्टी, पत्थर के छोटे टुकड़ों और स्टोन डस्ट से तैयार जीएसबी एक आधार परत होती है. अब नई बनी पीसीसी सड़क की मजबूती और भार क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं.
एप्रोच रोड टूटने से लोगों ने की जांच की मांग
करीब 1.81 करोड़ रुपये की लागत से जामताड़ा-दक्षिणबहाल मुख्य सड़क स्थित दक्षिणबहाल जोरिया में डायवर्सन पुल और लगभग 700 मीटर लंबी एप्रोच रोड का निर्माण कराया जा रहा है. निर्माण पूरा होने से पहले ही सड़क के करीब एक मीटर हिस्से में दरार और टूट-फूट सामने आने से गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सड़क में दरार और टूट-फूट की जानकारी विभाग को तब हुई, जब मीडिया ने उनका पक्ष जानना चाहा. इससे पहले निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे अभियंताओं को इसकी भनक तक नहीं थी. स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में मानक सामग्री और तकनीकी प्रावधानों की अनदेखी की गई है. लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.
