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भाजपा धर्म और जाति की राजनीति करती हैः राधाकृष्ण किशोर

भाजपा धर्म और जाति की राजनीति करती हैः राधाकृष्ण किशोर

द फॉलोअप, पलामू:

कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक राधाकृष्ण किशोर ने बीजेपी और उसकी राजनीति पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश में जाति और धर्म के आधार पर राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक भारत से जाति और धर्म की राजनीति खत्म नहीं होगी, तब तक देश वास्तव में मजबूत नहीं होगा। राधाकृष्ण किशोर ने अपने राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 12 साल पहले एक विशेष पार्टी और एक विशेष नेता के साथ देश के लोग जुड़ गए थे। उन्होंने कहा, "मैं भी हो गया था, मैं भी पांच साल वही था।" उन्होंने कहा कि बाद में जब उनका टिकट काट दिया गया, तब उन्होंने अपना राजनीतिक रुख बदला। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब और मैला-कुचैला कपड़ा पहनने वाले लोगों को मंदिर जाने के मुद्दे पर नारे तो दिए जाते हैं, लेकिन वास्तविक सामाजिक बराबरी की बात नहीं की जाती। किशोर पलामू में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

'जातिवाद आप करते हैं'

किशोर ने आरोप लगाया कि बीजेपी जातिवाद की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि सत्ता और व्यवस्था में आम लोगों की बजाय बड़े-बड़े उद्योगपतियों का प्रभाव है। उनके मुताबिक गांव के लोगों को राम मंदिर जैसे मुद्दों के नाम पर बहलाया और फुसलाया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर एक बार सभी जातियों के लोग अलग-अलग क्षेत्रों में चुनाव लड़ेंगे, तब पता चलेगा कि जातिवाद की राजनीति वास्तव में कहां है। राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि चुनाव में ब्राह्मण, राजपूत, बनिया और दूसरी जातियों के उम्मीदवार अलग-अलग पार्टियों से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि तब यह भी देखने को मिलेगा कि किसी जाति का वोट किस पार्टी या उम्मीदवार के पक्ष में जाता है। उन्होंने कहा, "ब्राह्मण खड़ा होगा तो देखेंगे कि ब्राह्मण का वोट कहां जा रहा है। राजपूत खड़ा होगा तो देखेंगे कि राजपूत का वोट बीजेपी में जा रहा है या नहीं। व्यापारी वर्ग का वोट बीजेपी में जा रहा है या नहीं?"

'जाति और धर्म खत्म हुए बिना भारत मजबूत नहीं होगा'

किशोर ने 'विकसित भारत' के नारे का जिक्र करते हुए कहा कि केवल लोगों की जेब में पैसा डाल देने से देश मजबूत नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि गरीब और पिछड़े वर्ग के लोगों को आर्थिक मदद देने के साथ-साथ सामाजिक बराबरी भी जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में हुई एक बैठक के दौरान उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी यही बात कही थी। किशोर के मुताबिक उन्होंने कहा कि जब तक भारत से जाति और धर्म की राजनीति खत्म नहीं होगी, तब तक भारत मजबूत नहीं होगा।

'आपकी आबादी 20 प्रतिशत और उनकी 80 प्रतिशत, फिर राज किसका?'

किशोर ने सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की आबादी ज्यादा है, क्या सत्ता और व्यवस्था में उनका उसी अनुपात में प्रतिनिधित्व है? उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि अगर एक वर्ग की आबादी 20 प्रतिशत और दूसरे वर्ग की 80 प्रतिशत है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि राज किसका चल रहा है।

'कांग्रेस के वोटरों के बल पर आप चुनाव जीते'

बीजेपी नेताओं के कांग्रेस को लेकर दिए गए बयानों पर भी किशोर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आज जो लोग कांग्रेस को चोर कहते हैं, उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि कांग्रेस के साथ रहे मतदाताओं में से कई लोगों ने बाद में बीजेपी को वोट दिया। उन्होंने सवाल किया कि अगर कांग्रेस के वोटर ही बाद में बीजेपी के साथ आए और बीजेपी चुनाव जीती, तो उन मतदाताओं को चोर कहना कितना उचित है।

'मोदी का नारा यहां, उम्मीदवार का नारा वहां क्यों?'

किशोर ने खजुराहो और छतरपुर क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ जगहों पर लोग नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांगते हैं, जबकि दूसरे क्षेत्रों में स्थानीय बीजेपी उम्मीदवारों के नाम पर नारे लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर लोग वास्तव में किसी नेता की विचारधारा और नीतियों के आधार पर वोट करते हैं, तो हर जगह उसी आधार पर समर्थन होना चाहिए। उन्होंने मतदाताओं से जागरूक होने और राजनीतिक मुद्दों को समझने की अपील की। किशोर ने कहा कि राजनीति में बदलाव के लिए लोगों को जागरूक होना होगा और एकजुट होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों को राजनीति में आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि अगर जनता जागरूक हो जाती है और समाज जाग जाता है, तो राजनीति करने के पुराने तौर-तरीकों में बदलाव आएगा।

पूर्व विधायक के कामकाज पर भी उठाए सवाल

राधाकृष्ण किशोर ने क्षेत्र की पूर्व विधायक के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2019 के चुनाव में संबंधित उम्मीदवार को करीब 54 हजार वोट मिले थे, जबकि पांच साल बाद करीब 71 हजार वोट मिले। उन्होंने कहा कि वोटों में बढ़ोतरी जनता के आशीर्वाद का परिणाम थी। हालांकि उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या जनता ने पांच साल के कामकाज के आधार पर वोट दिया या किसी अन्य राजनीतिक समीकरण का असर रहा।

'मैं चुनाव नहीं लड़ रहा, लेकिन जागरूकता पैदा करूंगा'

किशोर ने कहा कि आने वाला चुनाव वह खुद नहीं लड़ना चाहते, लेकिन लोगों के बीच राजनीतिक जागरूकता पैदा करने का काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि जनता को अपने अधिकारों, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक दलों के कामकाज को समझना होगा। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि वह करीब 45 वर्षों के अनुभव के आधार पर ये बातें कह रहे हैं।

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