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Ranchi : कृषि विभाग में कार्यरत आत्मा-कर्मियों ने भरी हुंकार, समायोजन की मांग को लेकर देंगे अनिश्चितकालीन धरना

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रांची: 

झारखंड में कृषि विभाग में अनुबंध पर कार्यरत 500 से ज्यादा आत्मा कर्मियों ने 5 सितंबर (सोमवार) को कार्य बहिष्कार कर विरोध जताया। 7 सितंबर 2022 से राज्यभर के सभी आत्माकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे । हड़ताली आत्मा कर्मियों की मांग है कि उनको विभाग में स्थायी समायोजन मिले। समान कार्य का समान वेतन मिले। आंदोलनरत आत्मा कर्मचारियों ने बताया कि उनको बीते 7 महीने से मानदेय भी नहीं मिला जिसकी वजह से वे लोग आर्थिक संकट का सामना भी कर रहे हैं।

कर्मचारियों ने अपने मांगों के समर्थन में (विशेष तौर पर समायोजन) मणिपुर और बिहार सरकार द्वारा इस संबंध में लिए गए फैसलों का तर्क दिया है। सोमवार को विभाग का कामकाज ठप रहा। 

कृषि विभाग में रिक्त पदों पर हो समायोजन!
झारखंड आत्मा कार्मिक संघ के बैनर तले राज्यव्यापी हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों की मांग है कि उनको कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग में रिक्त पड़े 1 हजार 949 पदों पर बहाल किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि इन पदों पर लंबे समय से नियुक्तियां नहीं हुई हैं।

विभाग में कार्यबल की जरूरत है। संघ का मानना है कि वे उपरोक्त पदों पर नियुक्ति के लिए तमाम अहर्ताएं पूरी करते हैं। फिलहाल अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारियों के पास विभिन्न संकायों में ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी तक की डिग्रियां हैं। चूंकि वे बीते तकरीबन 10 वर्षों से विभाग में कार्यरत हैं इसलिए उनको अलग से प्रशिक्षण की जरूरत भी नहीं होगी। कर्मियों की मांग है कि उनको जल्द से जल्द समायोजित किया जाए। 

2011 में अनुबंध पर हुई थी कर्मियों की बहाली
गौरतलब है कि साल 2011 में झारखंड सरकार के मातहत, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के अंतर्गत परियोजना निदेशक, उप-परियोजना निदेशक, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक, सहायक तकनीकी प्रबंधक, लेखपाल, कंप्यूटर ऑपरेटर, लिपिक, अनुसेवक तथा नाईट गार्ड के पदों पर 500 से ज्यादा कर्मियों को अनुबंध पर नियुक्त किया गया था। इनके कार्यकाल का 10 वर्ष से अधिक का वक्त बीत चुका है। बोकारो जिले में प्रखंड तकनीकी प्रबंधक के पद पर कार्यरत बबलू ने कहा कि मणिपुर की सरकार ने हाल ही में आत्मा कर्मियों को समायोजित किया है। बिहार सरकार भी वर्षों पूर्व ऐसा कर चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट का भी निर्देश है कि किसी विभाग में 10 वर्ष तक सेवा दे चुके कर्मियों को समायोजित किया जाना चाहिए। खुद, मौजूदा सरकार ने चुनावी घोषणापत्र में कहा था कि झारखंड के सभी अनुबंधकर्मियों को स्थायी किया जाएगा। बबलू कहते हैं कि हमने बीते 10 वर्षों में ना केवल विभाग बल्कि चुनाव तथा कानून-व्यवस्था के नजरिए से भी काम किया है। हमें सरकार जो भी दायित्व सौंपा है, हमने उसका भली-भांति निर्वहन किया। ऐसे में सरकार को चाहिए कि हमारी अहर्ता, योग्यता और कर्तव्यपरायणता को देखते हुए स्थायी समायोजन किया जाए। 

अनुबंध शब्द को खत्म कर हक दे सरकार! 
झारखंड आत्मा कार्मिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष मोतीलाल रजक ने कहा कि हमारी मुख्य मांग है कि हमें स्थायी रूप से समायोजित किया जाएगा। अनुबंध शब्द को खत्म करते हुए सरकार हमें हमारा हक दे और समायोजन करे। इसी मांग को लेकर हमलोग यहां धरना पर बैठे हैं।

मोतीलाल रजक ने कहा कि जब तक हमारी मांग पूरी नहीं होती, हम लोग अनिश्चितकालीन धरना पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी टीमें रांची की तरफ कूच करेगी। इसके लिए रणनीति बन रही है। संभवत 1 से 2 दिन में रांची जाएंगे और वहां अनिश्चितकालीन धरना देंगे। उन्होंने कहा कि हमारी मांगें जायज हैं।