रांची
नगर आयुक्त मुकेश कुमार द्वारा 15वें वित्त आयोग के तहत आवंटित फंड का दुरुपयोग करने के मामले में मेयर डॉ. आशा लकड़ा ने मुख्यमंत्री सह नगर विकास मंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है तथा मार्गदर्शन मांगा है। उन्होंने पत्र में नगर विकास विभाग के सचिव को लिखे गए पत्र का भी हवाला दिया है। पत्र में उन्होंने स्पष्ट तौर पर लिखा है कि 19 फरवरी 2022को नगर विकास विभाग के सचिव को इस विषय पर पत्र लिखा था, साथ ही पत्र की प्रतिलिपि मुख्य सचिव व विभागीय मंत्री को भी भेजा गया था। फिर भी अब तक इस मामले में किसी प्रकार का मार्गदर्शन नहीं दिया गया। इसलिए फिर से आपको पत्र लिखकर याद कराने की जरूरत पड़ी।

बिना अनुमति के टेंडर किया
मेयर ने कहा कि नगर आयुक्त ने निगम परिषद व स्थाई समिति से स्वीकृति लिए बिना 48 योजनाओं को निष्पादित कर दिया है। अब 48.94 करोड़ रुपये की इन योजनाओं को निगम परिषद की बैठक में लाकर घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान करने का दबाव बना रहे हैं। नगर आयुक्त ने 15वें वित्त आयोग के तहत आवंटित राशि का दुरुपयोग कर 48 योजनाओं का न सिर्फ टेंडर किया, बल्कि संबंधित योजनाओं का निष्पादन भी कर दिया। नियमानुसार, 15वें वित्त आयोग के तहत आवंटित राशि की उपयोगिता के लिए मेयर, डिप्टी मेयर समेत पार्षदों से बड़ी योजनाओं के प्रस्ताव मांगे जाते हैं।
उसके बाद संबंधित प्रस्तावों को निगम परिषद व स्थाई समिति की बैठक में लाकर स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य है। परंतु, नगर आयुक्त ने इस प्रक्रिया को दरकिनार कर स्वयं 48.94 करोड़ की योजनाओं का चयन कर लिया और नगर विकास विभाग के सचिव से प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त कर ली।

घटनोत्तर स्वीकृति कैसे प्रदान की जा सकती है
मेयर ने कहा कि जिन योजनाओं को निगम परिषद व स्थाई समिति की पूर्व की बैठकों में उपस्थापित ही नहीं किया गया, उसे निगम परिषद की आगामी बैठक में घटनोत्तर स्वीकृति कैसे प्रदान की जा सकती है। अमूमन घटनोत्तर स्वीकृति के तहत उन योजनाओं को शामिल किया जाता है, जो अति आवश्यक होते हैं। मेयर ने कहा कि यह मामला वित्त से संबंधित है। जब नगर आयुक्त ही स्वयं योजनाओं का चयन कर 15वें वित्त आयोग के तहत आवंटित राशि का दरुपयोग करेंगे तो इसे निगम परिषद की बैठक में लाकर घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान करने का औचित्य क्या है? नगर आयुक्त ने पूर्व में भी नगर निगम परिषद व स्थाई समिति के सदस्यों को गुमराह करने का कार्य किया था और अभी भी गुमराह करने का ही प्रयास कर रहे हैं। इसलिए इस विषय पर विभागीय मंत्री व सचिव से मार्गदर्शन मिलने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।