logo

सत्ता और सचिवालय का सच : सुमित के प्रति हमदर्दी बढ़ी तो दूर हो गए रंजन

satta_ka_sach6.jpg

जीतेंद्र कुमार
रंजन का इस्तीफा सत्ता के गलियारे में धूम मचा रहा है। राजनीति के खिलाड़ी ही नहीं सत्ता के मदारी आश्चर्यित हैं। अचानक से डेढ़ साल बाद हुए इस उठा-पटक को लेकर कई सत्ता के गलियारे और ब्यूरोक्रेसी के ड्राइंग रूम में तरह तरह की चर्चा होने लगी है। कोई इसे सरकार के साथ कांग्रेस की बढ़ती दूरी का परिणाम बता रहा है। कोई इसे सुमित से सरकार की नजदीकी का अंजाम मान रहे हैं। बताते हैं कि सुमित का सरकार में पैठ तेजी से पांव पसार रहा था। इसको लेकर पिछले कुछ दिनों से रंजन असहज महसूस करने लगे थे। इस कारण सरकार के प्रति उनकी निष्ठा और घनिष्ठता, दोनों कमजोर होने लगी थी।


इधर चर्चा के क्रम में इसे कांग्रेस से सरकार की बढ़ती दूरी से भी जोड़ा जा रहा है। जानकार बताते हैं कि रंजन कांग्रेस के कारण ही बने थे। राहुल के एक मुकदमें में पैरवी कर उन्हें न्यायालय का चक्कर लगाने से निजात दिलायी थी। इसी कारण उन्हें उपहार स्वरूप बड़ा पद मिला। अब कांग्रेस से सरकार की खट-पट बढ़ती जा रही है। राज्यसभा का चुनाव इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। वैसे सत्ता के गलियारे में बैठे लोग भी उस तात्कालिक कारण को बेसब्री से ढूंढ रहे हैं, जिस कारण रंजन के प्रति राजा का अपनत्व वाला मिजाज अचानक क्यों बदल गया। उसमें बड़गाईं मौजा का मुकदमा भी बताया जा रहा है, जिसमें लोअर कोर्ट से राजा को रिलिफ नहीं मिला। इसके विरुद्ध अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की रणनीति भी बनायी जा रही है, जिसमें रंजन की भूमिका को गौन करके संदेश दिया जा रहा था। 

Tags - Jharkhand Power and Secretariat Truth Anonymous Events