द फॉलोअप डेस्क, रांची:
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के काफिले में शामिल वाहन दुर्घटना का शिकार हो गया। खूंटी से जमशेदपुर जाने के क्रम में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-33 स्थित चौका के पास यह हादसा हुआ। हादसे में किसी प्रकार की अनहोनी तो नहीं हुई, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा मुहैया कराई जा रही सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। अर्जुन मुंडा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे वाहनों की स्थिति काफी खराब है। पूर्व सीएम ने लिखा कि मामला केवल मेरी सुरक्षा का नहीं है, बल्कि दिन-रात अपने कर्तव्य का निर्वहन करने वाले सुरक्षाकर्मियों के जीवन से जुड़ा गंभीर मसला है।
अर्जुन मुंडा ने 6 बार पत्राचार की दी जानकारी
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने जानकारी दी है कि वर्ष 2024 में 28 जुलाई और 22 अगस्त , वर्ष 2025 में 19 मई और 11 सितंबर को और वर्ष 2026 में 9 मार्च और 29 जून को पत्र लिखकर वाहनों की खराब स्थिति के बारे में बताया गया था। केवल इतना ही नहीं, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा भी 14 मार्च को पत्रांक 08/सुरक्षा(II)-01/2025, ज्ञापांक 1645 के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई हेतु पत्र जारी किया गया था। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। अर्जुन मुंडा ने आरोप लगाया है कि सामान्य मरम्मत कर वाहनों को पुनः भेज दिया जाता है और कुछ ही समय बाद वही तकनीकी समस्याएं फिर सामने आने लगती हैं। साथ ही आज तक सुरक्षा हेतु कोई भी समीक्षा भी विभाग के द्वारा नहीं की गयी, जो घोर लापरवाही है।

पुराने और जर्जर वाहन सुरक्षा काफिले में हैं!
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि हैरानी की बात है कि अत्यंत पुराने और जर्जर वाहन भी सुरक्षा काफिले में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। वाहनों पर सायरन और झंडे जैसी पहचान की व्यवस्था नहीं होने से अन्य वाहन चालकों को सुरक्षा काफिले का पता नहीं चल पाता और कई बार दूसरी गाड़ियां कारकेड के बीच में घुस जाती हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था और भी प्रभावित होती है। शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता हो, जब इन वाहनों में कोई तकनीकी समस्या सामने न आती हो। पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल किया है कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी?
अर्जुन मुंडा ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा से जुड़ी गंभीर जिम्मेदारी है। सरकार को इस विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए सुरक्षा काफिले में निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित और तकनीकी रूप से दुरुस्त वाहन उपलब्ध कराने चाहिए।