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FRO के 743 सफल अभ्यर्थियों में 119 पतंजलि IAS के संचालक संजीत के संपर्क में थे, JPSC परीक्षा विवाद में नया खुलासा!

FRO के 743 सफल अभ्यर्थियों में 119 पतंजलि IAS के संचालक संजीत के संपर्क में थे, JPSC परीक्षा विवाद में नया खुलासा!

द फॉलोअप डेस्क, रांची:

Jharkhand News: JPSC की फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) प्रतियोगिता परीक्षा में धांधली के आरोप में जेल में बंद पंतजलि IAS एकेडमी के संचालक संजीत कुमार की जमानत याचिका खारिज हो गई है। बताया जाता है कि फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर की मुख्य परीक्षा में सफल घोषित 743 अभ्यर्थियों में से 119 लोग संजीत कुमार के सीधे संपर्क में थे। संजीत कुमार के मोबाइल नंबर- 9304911779 और 9693134313 के कॉल रिकॉर्ड की पड़ताल में ये जानकारी सामने आई है। 

कोर्ट ने नहीं मानी संजीत कुमार की दलील
बताया जाता है कि अपर न्यायिक आय़ुक्त योगेश कुमार की अदालत ने  केस की गंभीरता और CID द्वारा केस डायरी में प्रस्तुत पुख्ता तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर संजीत कुमार की जमानत याचिका खारिज की। संजीत कुमार ने अपने बचाव में यह दलील दी थी कि वह बड़ी कोचिंग संस्थान का संचालन करते हैं और करीब 4 हजार छात्र उनके संपर्क में रहते हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह कहकर इन दलीलों का खंडन किया कि अन्य साक्ष्यों के अलावा 743 में  से 119 छात्रों का सीधे संपर्क में होने काफी संदिग्ध मामला है और जमानत नहीं दी जा सकती। 

सीआईडी ने कोर्ट में कौन से सबूत पेश किए!
सीआईडी (CID) ने कोर्ट को यह जानकारी दी है कि फॉरेस्ट रेंज मुख्य परीक्षा में सफल घोषित ऋतिक रोशन और पंकज प्रसून पतंजलि IAS एकेडमी के संचालक संजीत कुमार के करीबी रिश्तेदार हैं। सीआईडी का कहना है कि उसकी पड़ताल के मुताबिक ऋतिक रोशन को पास कराने के एवज में 20 लाख रुपये की बड़ी रकम में डील तय की गई थी। यह रकम किश्तों में दी गई थी। बताया जाता है कि दोनों अभ्यर्थियों के बयान और बैंक ट्रांजेक्शन ने संजीत की भूमिका का पर्दाफाश कर दिया है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से रांची के ऑटोमोबाइल एजेंसी का आधिकारिक रिकॉर्ड भी कोर्ट में पेश किया गया, जिसमें गिरोह के सह आरोपी धर्मेंद्र कुमार द्वारा खरीदी गई स्विफ्ट डिजायर कार के डाउन पेमेंट के लिए संजीत कुमार की UPI आईडी से 1.69 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।

पैसे संजीत के एक्सिस बैंक खाते से धर्मेंद्र की पत्नी के खाते में भेजे गए थे। संजीत कुमार ने दलील दी कि यह रकम दरअसल, कोचिंग शिक्षक रविशंकर की गारंटी पर दिया गया पर्सनल लोन है, लेकिन अदालत ने यह दलील स्वीकार नहीं की। 

ब्लैकलिस्टेड कंपनी को सौंपा परीक्षा संचालन
सीआईडी की प्राथमिकी के मुताबिक लखनऊ के जानकीपुरम स्थित मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) को झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग ने 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया था, बावजूद इसके झारखंड लोक सेवा आयोग के अधिकारियों की मिलीभगत से TDPL को बिना किसी टेंडर के आधार पर ही जून 2025 में एंड-टू-एंड परीक्षा कराने का गोपनीय काम सौंप दिया गया। जांच में एजेंसी के आवासीय ठिकाने पर रखे 4 कंप्यूटरों में से एक फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर की मुख्य परीक्षा का ऑन्सर शीट मिला।

दरअसल, JPSC की तात्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने आधिकारिक रूप से ऑन्सर की जारी होने से पहले ही झारखंड सिविल सेवा पीटी परीक्षा का ऑन्सर की व्हाट्सएप के जरिए  एजेंसी कर्मी मो. उस्मान को भेज दिया था। श्वेता कुमारी गुप्ता का तबादला दूसरे विभाग में किया जा चुका था, लेकिन वह JPSC  में ही बनी रहीं।  
14वीं JPSC सिविल सेवा पीटी परीक्षा से उठा विवाद!
गौरतलब है कि 14वीं JPSC सिविल सेवा पीटी परीक्षा का परिणाम जारी होते ही इसमें धांधली के आरोप लगे। दावा किया गया कि ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ करके कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया है। इसके अलावा JPSC और JSSC द्वारा आयोजित फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, फूड सेफ्टी ऑफिसर, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, महिला सुपरवाइजर, उत्पाद सिपाही और CGL समेत कई अन्य परीक्षाओं में धांधली के आरोप लगे। कई परीक्षाओं पर इसलिए भी सवाल उठा, क्योंकि उनका आयोजन TDPL द्वारा कराया गया था। इन परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लंबा आंदोलन भी चला। 17 अगस्त को सरकार ने 44 परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया। हालांकि, सरकार के फैसले पर कोर्ट ने स्टे लगा दिया। 

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