द फॉलोअप, रांची
सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गयी रिपोर्ट में न्याय मित्र (AMICUS CURIAE) राजू रामचंद्रन ने रिटायरमेंट से एक दिन पर झारखंड में DGP के पद पर तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर सवाल उठाये हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि तदाशा मिश्रा की सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले उन्हें DGP का पदभार सौंपकर दो साल का कार्यकाल देना सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के दिशा-निर्देशों और संघ लोक सेवा आयोग के नियमों के अनुरूप है या नहीं। AMICUS CURIAE ने रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों और डीजीपी नियुक्ति से संबंधित नियमों का उल्लेख करते हुए मामले के विभिन्न पहलुओं पर भी अपनी राय दी है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में सोमवार 7 सितंबर को डीजीपी की नियुक्ति मामले में अहम सुनवाई है।
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झारखंड सरकार ने 8 जनवरी 2025 को डीजीपी के चयन और नियुक्ति से संबंधित नए नियम अधिसूचित किया था। इसके खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी। याचिका में आरोप लगाया गया कि नए नियमों से प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय दिशा-निर्देश प्रभावित होते हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2025 को मामले में आदेश पारित किया। बाद में राज्य सरकार ने नियमों के नियम 5(सी) में संशोधन के तुरंत बाद 30 दिसंबर 2025 को नई नियुक्ति कर दी। इसे अदालत में चुनौती दी गयी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार ने यूपीएससी को नाम भेजे बिना संशोधित नियमों के आधार पर डीजीपी की नियुक्ति की। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों में डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी की प्रक्रिया का पालन किए जाने की बात कही गयी है।
