दीपक झा/जामताड़ा
जामताड़ा प्रखंड के गोपालपुर पंचायत अंतर्गत शहरबेड़ा गांव में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण एक 40 वर्षीय आदिवासी दिहाड़ी मजदूर को ट्रैक्टर की ट्रॉली पर खटिया में लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा। हालांकि इलाज शुरू होने से पहले ही उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान मोनू टुडू के रूप में हुई है। शुक्रवार रात करीब 8 बजे उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद परिजनों ने 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क करने की कोशिश की।

घंटों कॉल के बावजूद नहीं मिली मदद
परिजनों का आरोप है कि वे लगातार 108 एंबुलेंस सेवा पर फोन करते रहे, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। घंटों इंतजार और गुहार के बावजूद जब कोई सहायता नहीं पहुंची, तो मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। सरकारी व्यवस्था से निराश होकर ग्रामीणों और परिजनों ने खुद ही पहल की। गांव में उपलब्ध एक ट्रैक्टर की ट्रॉली पर खटिया रखकर मोनू टुडू को उस पर लिटाया गया और किसी तरह जामताड़ा सदर अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल पहुंचने के बाद तोड़ दिया दम
जामताड़ा सदर अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। उपचार के दौरान मोनू टुडू की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

तीन बेटियों और एक बेटे को छोड़ गया मोनू
मोनू टुडू एक गरीब दिहाड़ी मजदूर था, जो मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसके निधन के बाद तीन छोटी बेटियां और एक 10 वर्षीय बेटा बेसहारा हो गए हैं। घटना के बाद गांव पहुंची टीम ने पाया कि गांव तक जाने वाली सड़क का एक हिस्सा तो बना हुआ है, लेकिन शेष सड़क बेहद जर्जर और बदहाल स्थिति में है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग या अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हुआ और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।