द फॉलोअप डेस्क
सूचना छुपाने का सीधा अर्थ भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने से जुड़ा है। अगर सरकार के स्तर पर लिए जाने वाले निर्णयों, आदेशों और संकल्पों को सार्वजनिक नहीं किया जाता है तो इसका सीधा असर पारदर्शिता पर पड़ता है। भ्रष्टाचार और भेदभाव को बढ़ावा मिलता है। लेकिन झारखंड में ऐसा ही हो रहा है। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के वेबसाइट दो दो साल से अपडेट नहीं हैं। क्षेत्रीय कार्यालयों, निदेशालयों और अंचल कार्यालयों के वेबसाइट की स्थिति और भी बुरी है। कुछ विभागों और क्षेत्रीय कार्यालयों के वेबसाइट अपडेट भी हैं तो उस पर पिक एंड चुज पॉलिसी के तहत जानकारी अपलोड किया जा रहा है। जबकि गोपनीय विषयों को छोड़ विभाग और सरकार के शीर्ष स्तर पर लिए जाने वाले हर निर्णयों को इस पर डालने का प्रावधान है। पिछले दिनों विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जेएलकेएम के एक मात्र विधायक जयराम महतो ने सदन में इस विषय को काफी गंभीरता से उठाया था। उन्होंने कहा था कि आज आईटी का जमाना है। खुशी की बात है कि मुख्यमंत्री ट्विटर पर एक्टिव हैं। लेकिन राज्य सरकार के अधिकतर सचिव, विभागीय सचिव और प्रधान सचिव ट्विटर पर एक्टिव नहीं हैं। सरकार इन बड़े अधिकारियों को ट्विटर पर एक्टिव होने का आदेश दे,ताकि जनता की समस्याओं को समय से निराकरण हो सके।

अधिकतर मंत्री व्हाट्स एप ग्रुप से चला रहे सरकार
झारखंड में अधिकतर मंत्री अपना अपना व्हाट्स एप ग्रुप बना रखे हैं। इन ग्रुपों का भी दायर सीमित है। विभागीय निर्णयों, संकल्पों या आदेशों की जानकारी देने के बदले मीडिया में छपने लायक सूचनाएं देना ही, इसा मुख्य मकसद है। इसकी सीमा भी विभागीय प्रधानों तक जाते जाते समाप्त हो जाती है। विभागीय सचिव, निदेशक या अन्य कोई बड़ा पदाधिकारी व्हाट्स एप ग्रुप बनाना अपने गले में फंदा डालने के समान समझते हैं। वे मानते, समझते और उस पर ईमानदारी से अमल करते हैं कि चुपचुप लिए जा रहे निर्णयों को गोपनीय रखने में ही भलाई है। उसके परिणाम सामने हैं। आम जनता आवश्यक सूचनाओं से मरहूम तो हो ही रही है लेकिन पाप का घड़ा फूटने पर बड़े अधिकारी जेल भी जा रहे हैं।

सूचना क्रांति के जमाने में हम कहां हैं
सूचना क्रांति के जमाने में आज हर व्यक्ति अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर देश दुनिया में होनेवाली घटनाओं, सरकार के स्तर पर लिए जाने वाले निर्णयों को जानना चाहता है। अपने पास पड़ोस और सरकार की बात तो छोड़ अमेरिका और इंग्लैंड में होनेवाली घटनाओं और बदलाव से वाकिफ रहना चाहता है। हम पूंजी निवेश के लिए दावोस और इंग्लैंड की यात्रा कर रहे हैं। विश्व के बड़ बड़े औद्योगिक घरानों और निवेशकों से बातचीत कर रहे हैं। उन्हें झारखंड के पोटेंशियल बताना चाहते हैं। लेकिन दिल्ली या मुंबई में बैठा कोई उद्योगपति या पूंजी निवेशक यह झारखंड में उद्योग लगाने के बारे में कोई जानकारी चाहता है, तो उद्योग विभाग का वेबसाइट अंतिम रूप से 28 नवंबर 2025 को अपडेट हुआ है। इसी तरह झारखंड के टूरिज्म डिपार्टमेंट का वेबसाइट 10 मार्च 2026 और लेबर का 12 फरवरी 2026 को अपडेट हुआ है।

आधिकारिक ब्रिफिंग की कोई व्यवस्था नहीं
पारदर्शिता के लिए सरकार के शीर्ष स्तर पर यह जरूरी होता है कि समय समय पर लिए जानेवाले निर्णयों को विभागीय प्रधान मीडिया ब्रिफिंग के माध्यम से आम जनता को जानकारी दें। लेकिन झारखंड में यह व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। विभागीय सचिव प्रेस ब्रीफिंग करने से कटते हैं। वे डरते हैं कि मीडिया से रु-ब-रू होने पर कहीं कोई किसी भ्रष्टाचार या अनियमितता से जुड़ा सवाल न पूछ दे। मिल बांट कर खाने जारी व्यवस्था कहीं उजागर न हो जाए। मुख्यमंत्री या विभागीय मंत्री तो कभी कभी मीडिया से औपचारिक रूप से मिल भी लेते हैं। सवालों के कुछ जवाब भी दे देते हैं। लेकिन मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, जैसे शीर्ष अधिकारी पूरी तरह बचते रहते हैं। इन अधिकारियों के कार्यालय कक्ष पर मिलने के लिए लगा बोर्ड और उस पर लिखा समय, पूरी तरह आईवाश है। न तय समय पर कोई अधिकारी अपने कार्यालय कक्ष में रहता है और ना ही रहने पर सामान्य तौर पर मिलता है।

कब किस विभाग का वेबसाइट अपडेट हुआ
कृषि- 18 दिसंबर 2025
कैबिनेट-16 मार्च 2026
ऊर्जा-12 फरवरी 2026
खाद्य आपूर्ति-26 फरवरी 2026
सूचना जनसंपर्क-10 दिसंबर 2024
विधि विभाग-2 जुलाई 2025
कल्याण विभाग-11 अगस्त 2025
भवन निर्माण-10 दिसंबर 2024
उत्पाद-16 अक्तूबर 2025
वन पर्यावरण-10दिसंबर 2024
गृह कारा-24 मार्च 2025
ग्रामीण विकास-12 फरवरी 2026
आईटी-10 फरवरी 2026
स्कूली शिक्षा-19 अगस्त 2025
नगर विकास-24 जून 2025
स्वास्थ्य-28 मार्च 2026
भू-राजस्व-13 मार्च 2026
टूरिज्म-10 मार्च 2026
श्रम नियोजन-12 फरवरी 2026
उद्योग-28 नवंबर 2025
पेयजल स्वच्छता-13 फरवरी 2026
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