गढ़वा:
Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिले के धुरकी प्रखंड में कनहर नदी के विभिन्न घाटों से कथित तौर पर अवैध बालू उत्खनन कर वनभूमि पर भंडारण करने और पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा (DC Pashupati Nath Mishra) ने उत्तरी वन प्रमंडल के वन प्रमंडल पदाधिकारी को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की नियमानुसार जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही, एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश दिया है।

वनभूमि पर पेड़ों की कटाई कर बालू भंडारण का आरोप
प्राप्त शिकायत के अनुसार, धुरकी क्षेत्र में जेसीबी और लोडर मशीनों की मदद से वनभूमि पर पेड़ों की कटाई की जा रही है। इसके बाद जमीन को समतल कर वहां अवैध रूप से बालू का भंडारण किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने इस गतिविधि में कुछ स्थानीय लोगों के साथ वन विभाग के कर्मियों की कथित संलिप्तता का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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दो लाख रुपये की कथित वसूली का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वनभूमि पर बालू का अवैध भंडारण करने के एवज में कथित तौर पर दो लाख रुपये की वसूली की जाती है। इस मामले में वनपाल, वनरक्षी और रेंजर की कथित मिलीभगत का भी उल्लेख किया गया है। जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित वन अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर आरोपों की सत्यता का पता लगाने का निर्देश दिया है।
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वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर असर की आशंका
शिकायतकर्ता के अनुसार, वनभूमि पर पेड़ों की कटाई और बालू के भंडारण से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं। जंगल में पेड़ों और आश्रयस्थलों के नष्ट होने से जंगली जानवरों के आसपास के गांवों की ओर आने की आशंका जताई गई है। इससे ग्रामीणों की जान-माल और फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बताया गया है।
जांच दल को मिला भारी मात्रा में बालू का भंडारण
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के साथ पेड़ों की कटाई और कथित अवैध बालू भंडारण से संबंधित वीडियो और जीपीएस फोटोग्राफ भी उपलब्ध कराए हैं। वहीं, जिला प्रशासन की ओर से गठित जिलास्तरीय जांच दल ने धुरकी प्रखंड के संबंधित क्षेत्र में भारी मात्रा में बालू का भंडारण पाया है। इस निष्कर्ष के बाद मामले में आगे की जांच और कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक स्तर पर निर्देश जारी किए गए हैं।
एक सप्ताह में कार्रवाई प्रतिवेदन देने का निर्देश
उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने उत्तरी वन प्रमंडल के वन प्रमंडल पदाधिकारी को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि जांच के दौरान जिन लोगों की संलिप्तता प्रमाणित होती है, उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, वनभूमि पर अवैध बालू भंडारण और पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा गया है। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। जिला प्रशासन ने वनभूमि, प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के आवास के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मामले में शीघ्र कार्रवाई करने पर जोर दिया है।